शावर की चुदाई के बाद हम दोनों ने कोटेज में हल्का नाश्ता किया—ताज़े फल जैसे अनानास और आम, जो मेरे होंठों पर रस छोड़ गए, और जूस जो हमने एक-दूसरे को पिलाया। अब हम प्राइवेट बीच पर हैं, जहाँ सफेद रेत हमारे पैरों के नीचे नरम है। मैं सन लाउंजर पर लेटी हूँ, मेरी ब्लैक बिकिनी धूप में चमक रही है। दीपक मेरे बगल में बैठा है, उसकी आँखें मेरी कर्वी बॉडी को घूर रही हैं। “कामिनी, इस बिकिनी में तू कितनी हॉट लग रही है... तेरी ये क्लीवेज देखकर मेरा मन कर रहा है तुझे अभी छू लूँ,” वो धीरे से कहता है, उसका हाथ मेरी नंगी जांघ पर सरकता है, उंगलियाँ हल्के से दबाते हुए।
मैं मुस्कुराकर उसकी ओर देखती हूँ, मेरी आँखों में शरारत है। “दीपक, तू भी तो मेरा जवान स्टड है... देख, यहां कोई नहीं है, सिर्फ हम और समंदर। क्या करेगा मेरे साथ? बता ना,” मैं व्हिस्पर करती हूँ, अपनी बिकिनी का स्ट्रिंग थोड़ा ढीला करके अपनी क्लीवेज और दिखाती हूँ। वो मेरे ऊपर झुकता है, उसकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही हैं। “क्या करूँ? तुझे इस रेत पर पटककर चोदना चाहता हूँ, कामिनी। तेरी ये गांड देखकर मेरा लंड पहले से ही तन गया है... महसूस कर,” वो कहता है, और मेरा हाथ पकड़कर अपनी शॉर्ट्स के ऊपर से अपने तने हुए लंड पर रखता है। मैं उसे सहलाती हूँ, “उफ्फ... दीपक, कितना सख्त है तेरा लंड... लेकिन पहले मुझे टीज़ कर... मैं तेरी रानी हूँ, मुझे सिड्यूस कर, तभी दूँगी।”
दीपक मेरी बिकिनी का टॉप थोड़ा साइड करता है, और मेरे भारी, गोल स्तनों को बाहर निकालता है। धूप मेरे निपल्स पर पड़ रही है, जो पहले से ही सख्त हो गए हैं। “कामिनी, तेरे ये चूचे कितने परफेक्ट हैं... बड़े, सॉफ्ट, और रसीले,” वो कहता है, और एक निपल को अपनी उंगलियों से रगड़ता है, फिर मुँह में ले लेता है। वो चूसता है, जीभ से घुमाता है, हल्के से काटता है। “आह्ह... दीपक, ऐसे चूस... हाँ, काट भी... तू मेरा जंगली शेर है, मुझे दर्द और मज़ा दोनों दे,” मैं सिसकारी लेती हूँ, मेरी चूत गीली होने लगती है। वो दूसरे स्तन पर स्विच करता है, “तेरे निपल्स कितने स्वीट हैं, कामिनी... मैं इन्हें पूरा दिन चूस सकता हूँ,” वो गुर्राता है, और साथ में अपना हाथ मेरी बिकिनी के बॉटम में सरका देता है, मेरी क्लिट को सहलाने लगता है।
मैं अपनी गांड ऊपर उठाती हूँ, “दीपक, अब मेरी बिकिनी उतार... मुझे पूरी नंगी कर, देखना चाहती हूँ तुझे मेरी बॉडी घूरते हुए,” मैं कहती हूँ। वो मेरी बिकिनी का टॉप और बॉटम उतार देता है, और अब मैं पूरी नंगी रेत पर लेटी हूँ। धूप मेरे पूरे जिस्म पर पड़ रही है, मेरी चिकनी स्किन चमक रही है। दीपक की आँखें मेरी गीली, गुलाबी चूत पर अटक जाती हैं। “कामिनी, तेरी चूत कितनी खूबसूरत है... गीली और तैयार... मैं इसे चाटूँगा,” वो कहता है, और मेरे पैरों को और फैलाकर अपनी जीभ मेरी क्लिट पर लगाता है। वो धीरे से चाटता है, जीभ को ऊपर-नीचे करता है, फिर मेरी चूत के होंठों को अलग करके अंदर डालता है। “उफ्फ... दीपक, तेरी जीभ कितनी जादुई है... और अंदर डाल, चाट मुझे जैसे कोई भूखा जानवर!” मैं चीखती हूँ, मेरे हाथ रेत में गड़ जाते हैं, और मैं अपनी गांड हिलाकर उसकी जीभ पर दबाती हूँ।
वो मेरी चूत में दो उंगलियाँ डाल देता है, उन्हें घुमाता है, मेरी जी-स्पॉट को टच करता है। “तेरी चूत का स्वाद कितना नमकीन और मीठा है, कामिनी... समंदर की तरह... मैं इसे चूस-चूसकर साफ कर दूँगा,” वो कहता है, और वैक्यूम की तरह चूसता है। मेरी साँसें तेज़ हो रही हैं, मैं उसके बाल पकड़कर कहती हूँ, “दीपक, अब तेरा लंड दे... मैं इसे चूसना चाहती हूँ... तेरे माल का स्वाद लेना है!” वो उठता है, अपनी शॉर्ट्स उतारता है, और उसका 7 इंच का मोटा, तना हुआ लंड बाहर आ जाता है, टिप पर प्री-कम चमक रहा है। “ले, कामिनी... चूस मेरा लंड... जैसे तू मेरी पर्सनल रंडी है,” वो कहता है, और मैं घुटनों पर उठकर उसका लंड मुँह में ले लेती हूँ।
मैं धीरे से टिप चाटती हूँ, उसका नमकीन प्री-कम निगलती हूँ, फिर पूरा लंड मुँह में लेती हूँ। मेरे होंठ उसके शाफ्ट पर टाइटली स्लाइड करते हैं, जीभ नसों पर घूमती है। “आह्ह... कामिनी, तू कितनी एक्सपर्ट है चूसने में... और गहरा ले, गले तक!” वो कराहता है, उसके हाथ मेरे बालों में कस जाते हैं, और वो हल्के थ्रस्ट्स मारता है। समंदर की लहरें अब हमारे घुटनों तक आ रही हैं, ठंडा पानी मेरी नंगी चूत को छू रहा है, जो और उत्तेजना बढ़ा रहा है। मैं उसके लंड को बाहर निकालकर चाटती हूँ, गेंदों को मुँह में लेती हूँ, “दीपक, तेरा लंड कितना टेस्टी है... अब चोद मुझे... मैं तेरे लंड के लिए तड़प रही हूँ!” मैं कहती हूँ।
वो मुझे रेत पर लिटाता है, मेरे पैर फैलाता है, और मिशनरी पोजिशन में अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रगड़ता है। “रुक, कामिनी... पहले टीज़ करूँगा... तुझे तड़पाऊँगा,” वो कहता है, और लंड का टिप मेरी क्लिट पर रगड़ता है, हल्के से अंदर डालता है फिर बाहर निकालता है। “दीपक, मत तड़पा... पूरा डाल ना... भर दे मेरी चूत!” मैं चीखती हूँ। आखिरकार, वो धीरे से पूरा लंड डाल देता है, इंच दर इंच, मेरी चूत की दीवारों को फैलाते हुए। “आह्ह... दीपक, तेरा लंड कितना मोटा और लंबा है... अंदर तक जा रहा है, मेरी जी-स्पॉट को हिट कर रहा है!” मैं सिसकारी लेती हूँ। वो धीरे-धीरे थ्रस्ट करना शुरू करता है, हर धक्के में अपना लंड पूरा बाहर निकालता है फिर गहरा डालता है। “कामिनी, तेरी चूत कितनी गर्म और गीली है... जैसे वेलवेट... मैं तुझे धीरे-धीरे चोदूँगा, हर थ्रस्ट महसूस कर,” वो कहता है।
मैं उसके कूल्हों को पकड़ती हूँ, अपनी गांड ऊपर उठाकर उसके थ्रस्ट्स से मैच करती हूँ। “हाँ, दीपक... ऐसे ही... अब स्पीड बढ़ा... जंगली बन जा!” मैं कहती हूँ। वो गति बढ़ाता है, अब हर थ्रस्ट तेज़ और गहरा, उसकी गेंदें मेरी गांड से टकरा रही हैं, स्लैप की आवाज़ लहरों के साथ मिल रही है। मेरे स्तन उछल रहे हैं, मैं उन्हें दबाती हूँ, निपल्स को चुटकी में लेती हूँ। “दीपक, और ज़ोर से... मेरी चूत तेरे लंड से फट रही है, लेकिन मज़ा आ रहा है!” मैं चीखती हूँ। वो मेरे ऊपर झुकता है, मेरे होंठ चूसते हुए कहता है, “तू मेरी है, कामिनी... मैं तुझे बीच पर चोद रहा हूँ, जैसे कोई पोर्न स्टार... तेरी सिसकारियाँ सुनकर समंदर भी जल रहा होगा!” मैं जवाब देती हूँ, “हाँ, चोद ना... मैं तेरी रंडी हूँ... भर दे मुझे!”
अब वो पोजिशन चेंज करता है। “घूम, कामिनी... अब डॉगी में लूँगा, तेरी गांड देखते हुए,” वो कहता है। मैं घुटनों और हाथों पर झुकती हूँ, अपनी गांड ऊपर करके, रेत मेरे घुटनों में चुभ रही है लेकिन उत्तेजना में कुछ महसूस नहीं हो रहा। वो मेरे कूल्हों को पकड़ता है, अपना लंड मेरी चूत में पीछे से डाल देता है। “उफ्फ... दीपक, पीछे से कितना गहरा लग रहा है... तेरा लंड मेरी गर्भाशय को छू रहा है!” मैं कराहती हूँ। वो धीरे से शुरू करता है, लेकिन जल्दी ही ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारता है, हर थ्रस्ट में मेरे कूल्हों को खींचता है, लंड पूरा अंदर-बाहर। “कामिनी, तेरी गांड कितनी सेक्सी है... गोल और रसीली... मैं इसे थप्पड़ मारूँ?” वो पूछता है, और हल्के से थप्पड़ मारता है, जो मेरी स्किन पर जलन पैदा करता है। “हाँ, मार ना... ज़ोर से मार... मैं तेरी स्लट हूँ... चोद मुझे जंगली की तरह!” मैं चीखती हूँ। वो थप्पड़ मारते हुए थ्रस्ट करता है, मेरी गांड लाल हो रही है, हर स्लैप के साथ मेरी चूत और कस जाती है।
मैं महसूस कर रही हूँ कि मेरा पहला ऑर्गेज़म करीब है। मेरी चूत में टिंगलिंग हो रही है, हर थ्रस्ट मुझे कगार पर ले जा रहा है। “दीपक... मैं झड़ने वाली हूँ... मत रुक... और ज़ोर से!” मैं चीखती हूँ। वो मेरे बाल पकड़ता है, मुझे पीछे खींचता है, “झड़ जा, कामिनी... तेरी चूत को कस ले मेरे लंड पर... मैं महसूस करना चाहता हूँ!” और मैं ज़ोर से चीखते हुए झड़ जाती हूँ, मेरी चूत से गर्म जूस निकलता है, जो उसके लंड को और स्लिपरी बना देता है, और कुछ रेत पर गिरता है। लेकिन वो रुकता नहीं, मेरी संवेदनशील चूत में थ्रस्ट जारी रखता है, जो मुझे दूसरे ऑर्गेज़म की ओर ले जा रहा है। “दीपक, मत रुक... मैं फिर से झड़ सकती हूँ... तू कमाल है!” मैं हाँफती हूँ।
अब वो मुझे साइड में लिटाता है, मेरी एक जांघ ऊपर उठाकर साइड-लाइंग पोजिशन में लंड डालता है। “कामिनी, अब इस तरह लूँगा... तेरी चूत को हर एंगल से चोदूँगा,” वो कहता है। वो धीरे-धीरे थ्रस्ट करता है, लेकिन गहरा, मेरी क्लिट को अपनी उंगली से रगड़ते हुए। “आह्ह... दीपक, तेरी उंगली और लंड का कॉम्बो... मैं पागल हो रही हूँ!” मैं कहती हूँ। वो स्पीड बढ़ाता है, हर थ्रस्ट में मेरी जी-स्पॉट को हिट करता है। “कामिनी, मैं अब झड़ने वाला हूँ... तेरी चूत मुझे मिल्क कर रही है... कहाँ डालूँ?” वो पूछता है। मैं कहती हूँ, “अंदर ही डाल... भर दे मेरी चूत तेरे गर्म माल से... मैं महसूस करना चाहती हूँ!” वो कुछ और तेज़ थ्रस्ट्स मारता है, उसका शरीर अकड़ जाता है, और वो चीखते हुए झड़ जाता है, उसका गर्म, गाढ़ा माल मेरी चूत में उड़ेल जाता है, दीवारों पर लगता है, और कुछ बाहर टपकता है। उसी वक्त, मैं भी दूसरी बार झड़ जाती हूँ, हमारा माल मिक्स हो जाता है।
हम दोनों हाँफते हुए रेत पर गिर पड़ते हैं, लहरें अब हमारे जिस्मों को धो रही हैं। दीपक मुझे अपनी बाहों में लेता है, “कामिनी, ये अब तक की सबसे डिटेल्ड और हॉट चुदाई थी... तू कमाल है,” वो कहता है, और मेरे माथे पर किस करता है।
कामिनी के नाम आपकी पाती
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