सुबह की हल्की धूप मेरे चेहरे पर पड़ रही है, और मैं धीरे से आँखें खोलती हूँ। दीपक मेरे भारी स्तनों पर सिर रखे सो रहा है, उसका जवान, टोन्ड जिस्म मेरे नंगे जिस्म से चिपका हुआ है। रात की चुदाई की गर्माहट अभी भी मेरी चूत में महसूस हो रही है, और मैं उसकी पीठ पर उंगलियाँ फिराते हुए उसे जगाती हूँ। “दीपक, उठ जा, मेरे शेर,” मैं व्हिस्पर करती हूँ, मेरी आवाज़ में शरारत भरी है।
वो आँखें मलते हुए मुस्कुराता है। “कामिनी, तू सुबह-सुबह भी इतनी हॉट कैसे लगती है?” वो कहता है, और मेरे होंठों पर एक हल्का किस करता है। मैं उसका तना हुआ लंड अपनी जांघ पर महसूस करती हूँ और हँसकर कहती हूँ, “ये क्या, तेरा लंड तो पहले से तैयार है! रात को इतना चोदा, फिर भी मन नहीं भरा?” वो मेरे निपल्स को हल्के से चुटकी में लेता है और कहता है, “तेरे जैसी माल के साथ मन कैसे भरेगा, कामिनी? तू तो आग है!”
मैं उसकी छाती पर हल्का थप्पड़ मारती हूँ और कहती हूँ, “चल, शावर लेते हैं। तुझे अपनी आग बुझाने का मौका देती हूँ।” वो हँसकर उठता है और मेरा हाथ पकड़कर कहता है, “बिना तुझे लिए शावर नहीं लूँगा। साथ चल, मेरी रानी।” मैं उसकी बात सुनकर गीली हो जाती हूँ और उसके साथ कोटेज के लग्जरी बाथरूम में चली जाती हूँ। ग्लास शावर के बाहर समंदर का नीला व्यू है, और अंदर गर्म पानी की धार तैयार है।
शावर ऑन करते ही गर्म पानी हम पर गिरने लगता है। दीपक मुझे अपनी बाहों में खींच लेता है और मेरे गीले जिस्म को देखकर कहता है, “कामिनी, ये पानी तुझे और सेक्सी बना रहा है। तेरे ये कर्व्स... उफ्फ!” वो मेरे स्तनों को दबाता है, और मैं उसकी गर्दन पर किस करते हुए कहती हूँ, “दीपक, तू भी तो मेरा जंगली शेर है। दिखा ना, कितना दम है तुझमें?” वो गुर्राता है, “रुक, तुझे अभी दिखाता हूँ!”
वो मुझे ग्लास दीवार से सटा देता है, मेरे पैर फैलाता है, और घुटनों के बल बैठकर मेरी चूत को चाटने लगता है। पानी की धार उसके चेहरे पर गिर रही है, लेकिन वो मेरी क्लिट पर जीभ फिराता रहता है। “आह्ह... दीपक, तू तो मुझे पागल कर देगा!” मैं सिसकारी लेती हूँ, मेरे हाथ उसके गीले बालों में कस जाते हैं। वो मेरी चूत में दो उंगलियाँ डालता है और कहता है, “तेरी चूत इतनी गीली है, कामिनी... ये पानी का कमाल है या मेरा?” मैं हाँफते हुए कहती हूँ, “तेरा कमाल है, मेरे शेर... और चाट, मत रुक!”
वो मेरी क्लिट को चूसता है, और मेरी चीखें बाथरूम में गूंजने लगती हैं। “दीपक... बस, अब तेरा लंड चाहिए!” मैं चीखती हूँ। वो उठता है, अपना 7 इंच का तना हुआ लंड मेरी जांघों पर रगड़ता है, और कहता है, “तुझे जंगली चुदाई चाहिए ना? ले, मेरी रानी!” वो अचानक से मेरा एक पैर उठाता है, उसे अपने कंधे पर रखता है, और अपना लंड मेरी चूत में पूरा घुसा देता है। “आह्ह... दीपक... इतना गहरा!” मैं चीखती हूँ, मेरे नाखून उसकी पीठ पर गड़ जाते हैं।
वो ज़ोर-ज़ोर से थ्रस्ट करता है, हर धक्के के साथ मेरा शरीर गीली दीवार से टकराता है। पानी की धारें हमारे बीच में स्प्लैश कर रही हैं, और स्लिपरी फील इसे और इंटेंस बना रहा है। “कामिनी, तेरी चूत कितनी टाइट है... मैं तुझे रोज़ चोदना चाहता हूँ!” वो गुर्राता है, और मैं जवाब देती हूँ, “चोद ना, दीपक... फाड़ दे मुझे... ये हनीमून तेरा है!” वो मेरे निपल्स को काटता है, और मैं और ज़ोर से सिसकारी लेती हूँ, “हाँ... ऐसे ही... मेरे शेर, और ज़ोर से!”
वो पोजिशन चेंज करता है। “घूम, कामिनी... अब पीछे से लूँगा,” वो कहता है। मैं दीवार पर हाथ टिकाकर अपनी गांड उसकी ओर करती हूँ। वो मेरे कूल्हों को पकड़ता है और स्टैंडिंग डॉगी में अपना लंड मेरी चूत में डाल देता है। “उफ्फ... दीपक, तेरा लंड मुझे अंदर तक चीर रहा है!” मैं चीखती हूँ। वो मेरे गीले बाल पकड़ता है और कहता है, “ये ले, मेरी रानी... तुझे जंगली चुदाई का मज़ा देता हूँ!” हर थ्रस्ट के साथ मेरे स्तन हिल रहे हैं, और पानी का स्प्लैश मेरे चरम सुख को और करीब ला रहा है।
“दीपक... मैं झड़ने वाली हूँ... मत रुक!” मैं चीखती हूँ, और वो और तेज़ हो जाता है। “मैं भी, कामिनी... तेरे अंदर झड़ूँगा!” वो गुर्राता है। कुछ ही सेकंड में, मेरी चूत उसके लंड पर कस जाती है, और मैं ज़ोर से चीखते हुए झड़ जाती हूँ। उसी वक्त, दीपक का गर्म माल मेरी चूत में उड़ेल जाता है, और पानी उसे धो देता है। हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, शावर की धार के नीचे।
“कामिनी, तू सच में आग है,” दीपक हाँफते हुए कहता है, और मुझे एक गहरा किस करता है। मैं मुस्कुराकर कहती हूँ, “और तू मेरा जंगली शेर... ये हनीमून कभी खत्म न हो!” मैं उसके लंड को हल्के से सहलाती हूँ और कहती हूँ, “अब नाश्ता करें, या फिर एक राउंड और?” वो हँसकर कहता है, “पहले नाश्ता, फिर तुझे बिच पर फिर से चोदूँगा!”
कामिनी के नाम आपकी पाती
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