कामिनी और रामू — लांड्री रूम का अनकहा सच
CHAPTER 04 Secret Encounters

कामिनी और रामू — लांड्री रूम का अनकहा सच

The Laundry Room Secret: Raw Desires
"मेरी रेशमी गुलाबी पैंटी उसके हाथ में थी—वो उसे मुँह के पास लेकर गहरी सांस ले रहा था..."
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नाम सिर्फ रामू, काम उसका सब कुछ। लांड्री रूम में आज सुबह जैसे ही छुप कर गई—बस यूं ही, छुपने का मन था—मेरा दिल तेज धड़क उठा। वहां का मंजर देख के मेरी सांस अंदर ही अटक गई।

मेरी रेशमी गुलाबी पैंटी उसके हाथ में थी—वो उसके मुँह के पास लेकर गहरी सांस ले रहा था, आँखें बंद, जैसा कोई महँगा परफ्यूम हो। “हन्न्ह्ह… मैडम की खुशबू…” उसके होठों से निकल गया, बिना सोचे समझ के। दूसरे हाथ में मेरी लैसी ब्रा थी—उसने अपने लंड के चारों तरफ लपेट रखी थी, और धीरे-धीरे हिला रहा था। उसका लंड… उफ़, क्या चीज़ थी। एकदम ठंडा हुआ, टाइट, डार्क टिप से हल्की सी लीक शीन—शुद्ध 8 इंच का लंबा, दिख ही नहीं रहा था के वो नौकर है या कोई पोर्नस्टार।

मैं बस देखती रह गयी, मेरी चूत में सुगबुगाहत होने लगी थी पहले से ही। फिर मैंने पीछे से उसका कंधा पकड़ा, झट से। “रामू!”

वो एकदम से उछल पड़ा, आँखों में डर, शर्म, और पकड़े जाने की घुटन थी। "एम-मैडम! मैं... मैं तो बस..."

“चुप,” मैंने उसका कॉलर पकड़ के उसको दीवार के खिलाफ ढकेल दिया। "मुझे दिखा अपना वो," मैंने उसकी पायजामा को नीचे खींच दिया- उसका लंड सीधा मेरे सामने था, धड़कता हुआ, मेरे मुंह के इतना पास के मेरी सांस उसके टिप से टकरा रही थी।

मैं अपने घुटनों के बल बैठ गई, बिना एक और शब्द के उसका सुका लंड पकड़ के अपने गरम, चुस्ट होंटन के बीच ले लिया—“मम्म्म्म्म्फ्ह्ह…”—मेरी ज़ुबान ने उसके शाफ्ट को लपेटना शुरू किया, धीमे, मजबूत स्ट्रोक्स में। रामू ने सीधा मेरा सिर पकड़ लिया, दोनों हाथों से, और धीरे से जोर लगाना शुरू किया।

“आह मैडम… मैडम क्या कर रही हैं आप…” उसकी आवाज टूट रही थी। पर मेरी आंखें उसकी आंखों से मिली, और मैंने और गहरा ले लिया। उसका लंड मेरे गले के अंदर तक चला गया, और मेरा गला भर गया था उसकी गंध से, उसकी त्वचा के स्वाद से।

"मैडम... आह्ह... आ रहा है..." और उसने एक अंतिम गहरा धक्का दिया-ग्लक ग्लक ग्लक स्पलर्ट!-उसका गरम वीर्य मेरे गले के अंदर चला गया, मोटे जेट के साथ, मेरा मुंह भर गया था। मैं सब निगल गई, एक बूंद भी बर्बाद नहीं की। फिर अपनी जुबान से टिप साफ किया जैसे आइसक्रीम स्टिक चाट रहा हूं।

उसका चेहरा लाल, बिना तेजी से चल रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और सीधा अपने बेडरूम की तरफ खींच लाई।

“अभी तो शुरुआत है, रामू…”

बेडरूम का दरवाज़ा बंद करते ही उसने मुझे ज़िद से खींच लिया, मेरे होठों पे चुंबन, धीमा लेकिन भूखा। उसकी ज़ुबान ने मेरी ज़ुबान से खेलना शुरू किया, मेरा गाला एक्सप्लोर करता हुआ। उसके हाथ ने पहले मेरी कमर के नीचे से मेरी कुर्ती उठाई, फिर मेरी ब्रा का हुक तोड़ दिया—मेरा क्लीवेज उसके सामने खुल गया। उसने दोनों स्तनों को अपने हाथों में भरा, मुँह में ले लिया एक निपल, चूसने लगा “स्लर्रर्प… म्म्म्म…”

मैं तो पिघल रही थी-बॉडी आर्क हो गई, निपल हार्ड हो गई।

“सब निकल दो,” मैंने फुफकारा।

रामू ने एक-एक करके मेरे कपड़े उतारे- कुर्ती, सलवार, ब्रा, पैंटी... मैं बिल्कुल नंगी हो चुकी थी, उसके सामने।

मैं बिस्तर पर लेट गई, टांगे खोल के, और उसने मेरा जिस्म किस करते हुए नीचे आया—मेरी चूत के पास रुका और एक गहरी सांस लिया। “मम्म्म… मैडम की चूत तो गुलाब जैसी महक रही है…”

और फिर उसने मेरा क्लिट चाटना शुरू कर दिया, लैप लैप लैप… मेरी कमर उठने लगी, “आआहह रामू… वाह वाह बेटा…” मैंने उसके बालों में हाथ डाल कर उसका मुंह और अन्दर घुसा दिया। 10 मिनट तक वो बस चाटता रहा—कभी मेरी चूत के होंठ, कभी अंदर, कभी भगनासा—पुरा विशेषज्ञता।

मुझे ऐसा लग रहा था कि अभी ही आग लग जाएगी, पर मैंने उसे ऊपर खींच लिया। “अब स्थिति बदलो।”

मैं उसके ऊपर चढ़ गई, अपने स्तन उसके मुँह के पास ले आई, और हम दोनों ने 69 पोजीशन ले लिया। मेरा मुँह उसके लंड पर, उसका मुँह मेरी चूत पर—फिर से। मैंने उसका लंड पकड़ के जोर से चूसना शुरू किया, "स्लर्प... स्लक... गल्प..." और वो मेरी चूत को किस करता रहा, चाटता रहा—मेरी जूस उसके मुँह में गिरती रही।

15 मिनट तक हम बस इसी में डूबे रहे, हर चूस के साथ मेरा बदन और टाइट हो गया। फिर उसने मुझे नीचे लाया, अपना 8 इंच का लंड मेरे प्रवेश द्वार पर रखा... और धीरे से अंदर डाला, मिशनरी में।

“आहहहह!” मेरी गाल निकल गई, चुत एकदम स्ट्रेच हो गई थी उसके मोटे लंड से।

उसने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया—धीमे धक्के, पूरा अंदर, फिर बाहर, फिर पूरा अंदर—मेरी आंखें पलक तक नहीं मार रही थी। “हाँ रामू… आआअहह… और तेज़…”

15 मिनट तक वो मेरी चूत को पूरा भरता रहा, कभी धीरे, कभी ज़ोर से। फिर मैंने उसे नीचे किया और खुद उसके ऊपर बैठ गयी।

"अब मेरी बारी है, रामू," मैंने हंसी छेड़ते हुए बोली। मैं उसके लंड पर बैठी और कूदना शुरू किया—“ठक! ठक! ठक!”—मेरे स्तन झटका रहे थे, उसने दोनों हाथों में लेके दबा लिया, मुंह से चूसने लगा। “उह्ह्ह्ह… हां… चूसो, जोर से… हां!”

वो मेरा नाभि चुंबन करता रहा, स्तन चूसता रहा, जब तक मैंने उसका लंड पूरा अंदर नहीं ले लिया, बार-बार।

फिर उसने मुझे पलटा, मुझे घोड़ी बनाया—डॉगी स्टाइल। मेरे कूल्हे उठाके उसने अपना लंड मेरे अन्दर घुसा दिया फिर से, "थड! थड! थड!" और साथ ही मेरी गांड पर ज़ोर से तमाचा मारा, "थप्प! थप्प!"

"आआआआआअह्हह्हह... रामू! मारो मुझे! हां! ऐसे ही चोद मुझे!"उसके हर धक्के के साथ मेरी चूत गरम होती जा रही थी, होंठ पूरी तरह फेल चुकी थी, अंदर और अंदर उसका लंड फुल स्पीड में जा रहा था, और फिर-

"मैडमम्म्म्म!! आ रहा हूऊन्न्न्!!" स्प्लर्ट स्प्लर्ट स्प्लर्ट!

गरम वीर्य मेरे अंदर तक चला गया, पूरा भर गया था, मेरी चूत से हल्का हल्का गिरता हुआ।

मैं नीचे गिर गई, हांप रही थी, गाल रही थी, मुस्कुरा भी रही थी।

"रामू..." मैंने कहा, "तुम सिर्फ नौकर नहीं हो..."

वो सांस फूलते हुए बोला, "मैडम, आप जैसा कहें..."

पाठक प्रतिक्रिया • Reader Confessions

कामिनी के नाम आपकी पाती

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2 प्रतिक्रियाएं (2 Confessions)
R
रोहित देसाई सत्यापित पाठक
2 दिन पहले
बारिश की बूंदें और खिड़की पर खड़ा दीपक... इस अध्याय का माहौल एकदम सिनेमाई और उत्तेजक है।
A
आरती वर्मा सत्यापित पाठक
5 दिन पहले
कल्प की याद और बदन की आग... दोनों का द्वंद्व बहुत ख़ूबसूरती से उभारा है कामिनी जी।
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