अचानक एक दिन दोपहर में किसी ने दरवाजे की बेल बजा दी।
मैं घाघरा और ब्रा पहने किचन में ही खड़ी थी। मैंने दरवाजा खोल दिया। सामने एक लड़का खड़ा था। वह बोला- मैडम, मैं विमल हूँ, गैस सिलेंडर लाया हूँ।
वह 28-30 साल का गोरा-चिट्टा, तगड़ा-तंदरुस्त लड़का मुझे एक ही नज़र में भा गया। मेरे बदन में सुरसुरी होने लगी।
मैंने कहा- अच्छा… इसे किचन में ही रख दो। उसने सिलेंडर किचन के कोने में रख दिया।
फिर मैं पुराना सिलेंडर झुककर निकालने लगी तो उसकी नज़र मेरी उभरी हुई चूचियों पर पड़ी। उसकी नज़रें वहीं गड़ी रहीं। फिर बोला- रहने दो मैडम, मैं निकाल लूंगा।
वह सिलेंडर निकालने लगा लेकिन उसकी नज़रें मेरे बूब्स से हटीं नहीं। आखिर में वह बोल पड़ा- मैडम आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं।
मैंने मुस्कराकर कहा- अच्छा लाइन मार रहे हो क्या?
वह बोला- नहीं मैडम, आप सच में बहुत सेक्सी लग रही हो। वैसे लाइन मारने की मेरी हिम्मत कहाँ?
मैंने कहा- क्यों हिम्मत नहीं है? अच्छे-खासे मर्द हो, जवान हो, लाइन तो मार ही सकते हो?
वह बोला- लाइन मारने से क्या होगा? कुछ मिलेगा तो नहीं, बस मन मसोस कर रह जाऊंगा!
मैंने बड़े सेक्सी अंदाज़ में कहा- मिलता उनको है जो हिम्मत करते हैं।
फिर वह हिम्मत करके बोला- मैडम, आप बुरा न माने तो एक बात कहूं?
मैंने कहा- अच्छा, बुरा नहीं मानूंगी, बोलो क्या कहना चाहते हो?
उसने कहा- मैं आपको टच करना चाहता हूँ।
मैंने गुस्सा होने का नाटक करते हुए कहा- अच्छा तो तुम मुझे छूना चाहते हो? मेरे बदन पर अपना हाथ लगाना चाहते हो? तुम्हें शर्म नहीं आती एक औरत से ऐसी बात करते हुए? माना कि तुम मस्त जवान हैंडसम लड़के हो, पर ऐसा कैसे हो सकता है।
वह थोड़ा सकपका गया, बोला- मैडम सॉरी! माफ कर दीजिए। बस आपको देखकर अच्छा लगा तो कह दिया। मैं जाता हूँ।
मैं तब तक बहुत गरम हो चुकी थी। मैंने कहा- जाओगे कहाँ मादरचोद? चल यहीं किचन में, मैं तुझे बताती हूँ।
ऐसा कहकर मैंने किचन का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उसे किचन के बीच में खड़ा करके पूछा- सच बताओ कि तुम मुझमें क्या देख रहे थे? डरो नहीं। मैं नाराज़ नहीं हूँगी!
वह बोला- मैडम मैं आपकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ देख रहा था।
मैं तो गरम थी ही… मैंने मुस्कराते हुए पूछा- तुमको मेरी चूचियाँ अच्छी लगती हैं?
तो वह बोला- अच्छी ही नहीं, बहुत अच्छी लगती हैं मैडम!
मेरे बदन में सनसनी फैल गई और उसी जोश में मैंने अपनी दोनों चूचियाँ खोलकर दिखा दीं उसे!
उसकी आँखों में आँखें डालकर मैं बोली- लो अच्छी तरह देख लो इन्हें!
उसकी नज़रें मेरी मस्तानी चूचियों पर टिक गईं। वह बड़ी देर तक निहारता रहा मेरे बड़े-बड़े दूध!
मैंने मुस्कराते हुए कहा- लो इन्हें पकड़कर देख लो, मैं कुछ नहीं कहूँगी। मैंने खुद ही उसका हाथ पकड़कर अपनी चूचियों पर रख दिया।
वह मस्त हो गया। उसने मम्मे दबाए और कहा- बहुत बड़े-बड़े हैं आपके दूध मैडम!
तभी मेरे मुँह से निकला- मैडम की अम्मी की चूत! मुझे मैडम नहीं, चोदी कामिनी कहो। मैं तेरी भाभी हूँ भोसड़ी के और तू मेरा देवर। तूने मेरे मम्मे देखे हैं तो अब मैं भी तेरा लण्ड देखूँगी मादरचोद विमल। मैंने उसके लण्ड में आग लगाने के लिए मस्त-मस्त प्यार से उसे गालियाँ दीं।
ऐसा कहकर मैंने उसकी पैंट और कमीज उतार दीं। उसकी छोटे-छोटे बालों से भरी हुई चौड़ी छाती देखकर मेरे बदन की आग और भड़क गई। वह केवल चड्डी में आ गया। चड्डी का उभार बता रहा था कि उसका लण्ड साला अंदर ही अंदर खड़ा है।
मैंने उसी लण्ड के उभार को चड्डी के ऊपर से ही चूमा और दोनों तरफ उँगली फंसाकर चड्डी झर्र से नीचे घसीट दी। चड्डी के नीचे आते ही उसका लण्ड टन्न से मेरे गाल पर लगा।
लण्ड देखकर मैं गदगद हो गई। इतना प्यारा मोटा तगड़ा लण्ड मैं पहली बार देख रही थी। लण्ड का टोपा देखकर मैं उस पर मर मिटी। ऐसा लण्ड और ऐसा लण्ड का टोपा मैंने पहले कभी नहीं देखा था।
मैंने मन में कहा- मैंने इसे रोककर बहुत अच्छा किया। आज का दिन बहुत अच्छा गुजरेगा।
मैं किचन के काउंटर पर चूची खोलकर बैठ गई और वो मेरे सामने एकदम नंगा-नंगा खड़ा हो गया।
मैंने एक हाथ से पेल्हड़ थामे और दूसरे हाथ से लण्ड पकड़कर मुँह में भर लिया। मैं बड़े प्यार से लण्ड चाटने और चूसने लगी, लण्ड के टोपा के चारों तरफ अंदर ही अंदर अपनी जबान फिराने लगी।
वह सिसियाने लगा, बोला- कामिनी भाभी बड़ा मजा आ रहा है। मैं कहीं मुँह में ही न झड़ जाऊँ? इतनी मस्ती से तो मेरी मौसी भी नहीं चूसती मेरा लण्ड?
मैंने कहा- अच्छा, तो क्या तुम अपनी मौसी को चोदते हो?
वह बोला- हाँ भाभी, मैं मौसी को एक साल से चोद रहा हूँ।
फिर मुझे यकीन हो गया कि विमल आज मुझे अच्छी तरह से चोदेगा। मैं लण्ड चूसने में जुटी हुई थी और बातें भी कर रही थी।
इतने में उसने मेरे घाघरा का नाड़ा खोल डाला और बोला- पहले मुझे अपनी चूत दिखाओ कामिनी भाभी, अपने चूतड़ अपनी गाँड दिखाओ मुझे!
मैं खड़ी हुई तो घाघरा नीचे गिर गया और मैं मादरचोद उसके आगे एकदम नंगी हो गई।
उसने मेरी चिकनी चूत पर हाथ फिराया और बोला- वाओ… ये तो मेरी साली की चूत से भी ज्यादा मस्त है, ज्यादा गद्देदार है। इसे चोदने में ज्यादा मजा आएगा।
उसकी बातें सुनकर मैं और गुनगुना उठी। फिर मैं उसे किचन के फर्श पर लिटा दिया और उसकी दोनों टाँगों के बीच नंगी-नंगी बैठकर उसका लण्ड हिलाने लगी, लण्ड चूमने और चाटने लगी। फिर झुककर उसका लण्ड दुबारा चूसने लगी। मुझे उसका लौड़ा बहुत ज्यादा ही पसंद आ गया था।
हम दोनों वासना में डूबे हुए थे।
उसने मुझे खींचकर अपने बदन से चिपका लिया और फिर घूम गया। उसने अपना मुँह मेरी टाँगों के बीच घुसेड़ दिया और चाटने लगा मेरी चूत! उसका चूत चाटना मुझे बड़ा मजा देने लगा। वो साला अपनी जबान से ही मेरी चूत चोदने लगा। मैं समझ गई ये भोसड़ी वाला अनाड़ी नहीं है। इसे सच में औरत को मजा देना आता है।
मैं भी 69 की पोजीशन में उसका लण्ड चूसने में व्यस्त हो गई।
विमल बोला- हाय कामिनी भाभी, बड़ा मजा आ रहा है। मेरा लण्ड आज तक किसी ने इस तरह से नहीं चूसा। तेरी जबान में जादू है भाभी! वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गया था।
मैं किचन के प्लेटफॉर्म पर चूची खोलकर बैठी हुई थी। विमल मेरे सामने नंगा खड़ा था, उसका मोटा तगड़ा लण्ड सीधा खड़ा मेरे मुँह के पास। मैंने लण्ड को चूसा, चाटा, टोपा को जबान से घुमाया… लेकिन मेरी चूत अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।
मैंने खुद ही अपनी दोनों टाँगें फैला दीं। प्लेटफॉर्म की ठंडी सतह पर मेरी नंगी गांड टिकी हुई थी। मैंने टाँगें और चौड़ी कर दीं – एक टाँग किचन के सिंक की तरफ, दूसरी गैस स्टोव की तरफ – ताकि मेरी चूत पूरी तरह खुल जाए और उसके लण्ड के सामने आ जाए।
मैं बोली- “आ जा मादरचोद… प्लेटफॉर्म पर ही चोद मुझे। टाँगें फैलाई हुई हैं देख… पूरा लण्ड घुसेड़ दे मेरी चूत में!”
विमल आगे बढ़ा। उसने मेरे दोनों घुटनों को पकड़कर और ज्यादा फैला दिया। मेरी चिकनी, गीली चूत अब एकदम खुली हुई थी। उसने अपने मोटे लण्ड के टोपा को मेरी चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा।
मैं सिसक उठी- “साले… घुसा दे… इतनी देर मत लगा…”
एक ही जोरदार धक्के में उसने पूरा लण्ड अंदर पेल दिया। मेरे मुँह से जोर की आवाज निकली- “उफ्फ्… हाय रे… पूरा घुस गया… इतना गहरा!”
प्लेटफॉर्म पर लेटी हुई मेरी पीठ थोड़ी ऊपर उठी और फिर नीचे बैठी। विमल ने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। अब मेरी टाँगें पूरी तरह फैली हुई थीं, घुटने लगभग मेरे कानों के पास। मेरी चूत पूरी तरह खुली हुई थी और उसका मोटा लौड़ा अंदर-बाहर हो रहा था।
हर धक्के के साथ किचन का प्लेटफॉर्म हल्का-हल्का काँप रहा था। बर्तन हिल रहे थे। उसने रफ्तार बढ़ा दी। लण्ड पिस्टन की तरह मेरी चूत में आ-जा रहा था। हर बार टोपा मेरी बच्चेदानी तक जाकर टकराता और फिर बाहर निकलता।
मैं दोनों हाथों से प्लेटफॉर्म के किनारे पकड़े हुए चिल्ला रही थी-
“हाय… बहनचोद… जोर से… और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ डाल… टाँगें और फैला… पूरा लौड़ा अंदर ठोक…!”
विमल बोला- “देख भाभी… तेरी चूत कितनी खुली हुई है प्लेटफॉर्म पर… इतनी मस्त गीली चूत… आज पूरा रस निकाल दूँगा!”
वह झुक गया और मेरी एक चूची मुँह में ले ली, काटने लगा, चूसने लगा। नीचे से लण्ड और तेज धक्के मार रहा था। मेरी गांड प्लेटफॉर्म पर रगड़ खा रही थी। हर धक्के के साथ मेरी चूत से पानी की आवाज “छप-छप” निकल रही थी।
मैंने अपनी कमर ऊपर उठाई और उसके लण्ड को और अंदर लेने लगी।
“साले विमल… तू मस्त चोद रहा है… प्लेटफॉर्म पर टाँगें फैलाकर चुदवाने का मजा ही कुछ और है… मेरी चूत तेरे लौड़े की दीवानी हो गई है… चीर डाल इसे…!”
उसने मेरी टाँगों को और जोर से दबाया। अब मेरी टाँगें इतनी फैली हुई थीं कि मुझे खुद भी अपनी चूत साफ दिख रही थी – लाल, गीली, और उसके मोटे लण्ड से भरी हुई।
धक्के और तेज हो गए। मेरी सिसकारियाँ किचन में गूँजने लगीं।
“हाय रे… आ गई… आ गई… मेरी चूत पानी छोड़ रही है… मत रुक… और चोद…
मैं अपनी कमर हिला-हिलाकर उसके लण्ड का पूरा मजा लेने लगी। उसने रफ्तार बढ़ा दी। मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं- हाय रे… बड़ा मजा आ रहा है। तू मुझे अच्छी तरह चोद डाल, फाड़ डाल मेरी चूत। ये चूत साली बड़ी कमीनी है। बिना लण्ड के चुपचाप नहीं बैठती। चीर डाल मेरी चूत भोसड़ी के विमल! इतनी बेरहमी से चोद मुझे कि मेरी चूत क्या… मेरी अम्मी का भोसड़ा भी फट जाए। तू साला सही मायने में मर्द है। मुझे ऐसे ही लण्ड वाला मर्द चाहिए। वाओ, बड़ा मजा आ रहा है यार! तू चिंता न कर मादरचोद, मैं किसी दिन तुमसे अपनी अम्मी चुदवा लूँगी। मेरी अम्मी भी पराये मर्दों से चुदवाने में अव्वल है। खूब भोसड़ा फड़वाती है अपना।
विमल मेरी टाँगें अपने कंधे पर रखे हुए मुझे चोदने में जी-जान से जुटा था। पिस्टन की तरह उसका लण्ड मेरी चूत में आ-जा रहा था और साला अंदर तक चोट कर रहा था।
मेरी अम्मी ने एक बार कहा था- बेटी कामिनी, लण्ड वही अच्छा होता है जो अंदर बच्चेदानी तक घुसकर चोदे।
मैं बोली- हाय रे… मैं चाहती हूँ कि तू एक दिन मेरे सामने मेरी अम्मी भी चोदे। क्या मस्त लौड़ा है तेरा साला, मेरी अम्मी तो मस्त हो जाएगी।
मुझे विमल से चुदवाने जो मजा आ रहा था वह मैं बयां नहीं कर सकती। इतने बड़े-बड़े झटके मारे उसने कि मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। एक धार सी निकल पड़ी मेरी चूत से। ढीली हो गई मेरी बुर चोदी बुर।
फिर मैं फौरन घूम गई और लण्ड मुट्ठी में लेकर आगे-पीछे करने लगी। बस पल भर में ही लण्ड ने उगल दिया सारा माल मेरे मुँह में, मेरे होठों पर और मेरी चूचियों पर।
फिर हम दोनों किचन के फर्श पर ही दोनों नंगे-नंगे लेट गए। मेरी नज़र उसके लण्ड पर ही टिकी रही। लण्ड धीरे-धीरे करवटें बदलने लगा, लण्ड का टोपा गुब्बारा जैसा फूलने लगा। मुझे ये सब देखने में मजा आने लगा।
फिर अचानक मेरा हाथ वहाँ तक पहुँच गया और मैंने लण्ड पकड़ लिया। औरतों को खड़ा लण्ड पकड़ने में बड़ा मजा आता है। मुझे भी आ रहा था। मैं उसके पेल्हड़ सहलाते हुए लण्ड हिलाने लगी।
वह भी मेरे नंगे बदन पर हाथ फिराने लगा। मेरे चूतड़, मेरी चूत, मेरी चूची हर जगह उँगलियाँ घुमाने लगा।
मैंने देखा कि लौड़ा एकदम लोहे की तरह खड़ा हो गया है तो मैं झट से नंगी-नंगी लण्ड पर बैठ गई। मेरे बैठते ही लण्ड एक ही बार में गच्च से मेरी चूत में घुस गया। मैं थोड़ा आगे झुकी और अपने चूतड़ उठा-उठाके लण्ड पर पटकने लगी।
मुझे मजा आने लगा तो मैंने स्पीड बढ़ा दी। मुझे ऐसा अनुभव हुआ कि जैसे मैं लण्ड चोद रही हूँ।
मैं बोली- भोसड़ी के विमल, ये मत समझ कि मुझे चोदना नहीं आता। देख मैं कितनी मस्ती से तेरा लौड़ा चोद रही हूँ।
वह बोला- हाँ कामिनी भाभी और कस-कस के चोदो मेरा लौड़ा। इतना चोदो लौड़ा कि लौड़े की मम्मी चुद जाए साली!
मैंने कहा- हाँ आज मैं तेरे लण्ड की अम्मी चोद दूँगी। मैं और जल्दी-जल्दी उसके लण्ड पर कूदने लगी। हर बार लौड़ा मेरी चूत में घुस जाता और फिर बाहर निकल आता। मुझे इस तरह की चुदाई बहुत अच्छी लग रही थी।
वह बोला- हाय भाभी, और जोर लगाके चोदो मेरा लौड़ा… बड़ा मजा आ रहा है। मौसी ने तो मेरा लौड़ा कभी चोदा ही नहीं।
मैंने कहा- तेरी मौसी की बिटिया की बुर साले… उसे क्या मालूम कि लौड़ा कैसे चोदा जाता है। एक दिन मेरे सामने उसे पेलना तब मैं बताऊँगी उसे!
चुदाई हो ही रही थी कि अचानक उसने पैतरा बदल दिया और नीचे से उठकर खड़ा हो गया और मुझे गोद में उठा लिया। उसकी बलिष्ठ भुजाओं ने मेरी बॉडी को रोक लिया और नीचे से लौड़ा चूत में पेल दिया। मैं उसकी गोद में ही लटकी हुई चुदवाने लगी। लौड़ा साला पूरा घुस-घुसकर मेरी चूत का बाजा बजाने लगा।
यह एक अनोखी चुदाई थी मेरे लिए और मैं इसे अच्छी तरह एंजॉय करने लगी। मुझे आज तक किसी ने गोद में लेकर नहीं चोदा था। विमल ने मुझे एक नया मजा दिया तो मैं उसकी और उसके लण्ड की दीवानी हो गई।
इतने में मुझे अहसास हुआ कि वह मेरी गाँड में उँगली कर रहा है। वह भी मुझे अच्छा लगने लगा। वह मेरे कान में बोला- चोदी कामिनी, तेरी गाँड भी बड़ी मस्त है साली। तेरे चूतड़ बड़े सॉलिड हैं बहनचोद। आज मैंने अगर तेरी गाँड में लौड़ा नहीं ठोंका तो कुछ नहीं किया।
मैं समझ गई कि अब ये साला मादरचोद मेरी गाँड चोदेगा। मैं भी मन ही मन तैयार हो गई गाँड चुदवाने के लिए।
उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मोटा लण्ड घुसा गाँड में! मेरे मुँह से उफ्फ निकला- साले हरामजादे अब तू मेरी गाँड भी फाड़ डालेगा क्या भोसड़ी के?
10-12 बार लण्ड गाँड में अंदर-बाहर हुआ तो मजा आने लगा। मैं भी अपनी गाँड आगे-पीछे करती हुई मरवाने लगी। उस दिन मुझे मालूम हुआ कि गाँड मराने में कितना मजा आता है। मैंने मन में सोच लिया कि अब मैं हर बार गाँड भी मराया करूँगी।
लेकिन विमल साला बड़ा चालाक था, उसने बुर चोदना बंद नहीं किया, बीच-बीच में लौड़ा चूत में घुसेड़ ही देता था।
कुछ देर बाद मैं खलास हो गई और वह भी किनारे पहुँच गया। फिर मैंने घूमकर उसका लौड़ा मुट्ठी में लेकर आगे-पीछे किया तो उसने उगल दिया सारा माल मेरे मुँह में! और मैं देसी ब्लोजॉब सेक्स करके उसे गटक भी गई।
जब वह जाने लगा तो मैंने कहा- भोसड़ी के विमल, कल फिर आना और मुझे चोदकर जाना। हो सके तो अपने किसी दोस्त को भी लेते आना। मैं तेरे साथ दो-दो लण्ड से एक साथ चुदवाना चाहती हूँ।
वह बोला- चिंता न करो भाभीजान, कल मैं अपने दोस्त के साथ आऊँगा तेरी चूत और गाँड फाड़ने।