मैंने दरवाजा खोला तो मोहित खड़ा था। उसकी मॉम-डैड अचानक एक रिश्तेदार के यहाँ चले गए थे। उसकी मॉम मुझे घर की चाबी देना भूल गई थीं।
जब मोहित घर आया तो ताला लगा मिला। उसने मुझसे पूछा तो मैंने बताया—तेरी मॉम-डैड कहीं गए हैं। उसने सोचा अभी आ जाएँगे, इसलिए मेरे यहाँ ही बैठ गया। उसे प्यास लगी तो उसने मुझसे पानी माँगा और पिया। फिर उसने अपनी मॉम को कॉल किया।मैंने सुना, उसकी मॉम कह रही थीं—अरे मैं जल्दी-जल्दी में चाबी देना भूल गई हूँ और इधर हालत ऐसे हैं कि मैं तेरे डैड के साथ अब कल ही वापस आ पाऊँगी।
तू आंटी से मेरी बात करवा दे।मोहित ने फोन मुझे थमा दिया।
मैंने उसकी मम्मी से बात की और कहा—कोई बात नहीं भाभी, सब हो जाएगा। फोन काटने के बाद मैंने मोहित से कहा—अब तुम आज यहीं मेरे घर रुक जाओ।
रात को जब वह खाना खाकर आया तो मैंने उसे आवाज़ दी—मोहित, आज मेरे रूम में ही सो जाना। उसने झट से हाँ कर दी।जब वह मेरे रूम में आया तो मैं चारपाई पर लेटी हुई थी। वह तख्त पर बैठकर मुझसे बात करने लगा।
अचानक मैंने कहा—तीन दिन से मेरे कंधे, पीठ और कमर में बहुत दर्द हो रहा है!
मोहित तुरंत बोला—लाओ मैं दबा दूँ! मैंने हाँ कर दी।वह मेरे पास आकर मेरे कंधे दबाने लगा, फिर नाइटी के ऊपर से ही मेरी कमर दबाने लगा।
दबाते हुए वह बोला—आंटी, मैं आपके शरीर पर तेल लगाकर मालिश कर दूँ क्या?
मैंने कहा—नहीं बेटा, तुम क्यों परेशान होगे?
उसने तुरंत जवाब दिया—नहीं आंटी, इसमें परेशानी वाली कोई बात नहीं है।
बस आप तख्त पर लेट जाइए।
मैं बोली—वो तो ठीक है… पर तुम नाइटी में मसाज कैसे करोगे?
मोहित ने कहा—आंटी आप भी… मैं भी आपके बेटे की तरह हूँ।
आप नाइटी निकाल दीजिए।मैं तख्त पर आ गई, तुरंत नाइटी निकाल दी और लेट गई।
मेरी पैंटी में फूली गाँड बाहर निकली हुई थी।मोहित ने बिना देर किए सरसों का तेल लिया और मेरे कंधों की मालिश करने लगा।
पीठ और कंधे की मालिश करते-करते उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। वह मेरी कमर के नीचे से क्रॉस करके बैठा था, जिससे उसका सात इंच का लंड लोअर के ऊपर से ही मेरी गाँड को रगड़ रहा था।
अचानक मैं बोली—बेटा मोहित, कंधे में तो आराम मिल गया, अब जरा कमर की भी मालिश कर दे!उसने तुरंत कहा—जी आंटी, आप परेशान न हों।
मैं हर जगह की मालिश कर दूँगा आज आपकी… आपको भी बहुत मज़ा आएगा!
मैंने पूछा—हर जगह से मतलब?उसने कहा—आंटी, कमर, कंधे, पीठ और पैर!यह कहकर वह मेरी कमर पर मालिश करने लगा।
उसका लंड अब पूरे उफान पर था। मालिश करते हुए उसने धीरे से मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और गाँड के छेद तक उँगली से मालिश करने लगा।
उस समय मैंने कोई हरकत नहीं की। इससे उसकी हिम्मत और बढ़ गई।
अचानक उसने मेरी पैंटी नीचे खिसका दी।
मैं तुरंत बोली—मोहित, ये क्या कर रहे हो?
उसने कहा—कुछ नहीं आंटी, बस आप लेटी रहिए और सीधे हो जाइए।
जैसे ही मैं सीधी हुई, ब्रा के हुक खुले होने की वजह से मेरे बड़े-बड़े दूध बाहर आकर उछलने लगे। पैंटी तो उसने नीचे कर ही दी थी। फिर उसने मेरी पूरी पैंटी उतार दी और तेल लेकर मेरी जाँघों की मालिश करने लगा।
मैंने अपनी चूत के बाल भी शेव किए हुए थे और अपनी चूत पर हाथ फेरती हुई उसे अश्लीलता से देखने लगी।उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरी चूत को छुआ तो मेरी चूत एकदम गीली थी। बीच-बीच में मेरी चूत में उँगली भी कर देता था।मेरी चूत से अब पानी आने लगा था। मोहित ने आव देखा न ताव…
मेरी चूत से अपना मुँह लगाकर मेरी चूत का रस चाटने लगा।
मैं बोली—बेटा, ये क्या कर रहे हो?उसने एक हाथ मेरे मुँह पर रखा और दूसरे हाथ से मेरे मोटे दूध दबाने लगा।
अब मुझे भी मज़ा आने लगा था।मैंने दोनों हाथों से पकड़कर उसका सर अपनी चूत में घुसेड़ दिया। और वह पोर्न की तरह मुझे सेक्स का मज़ा देते हुए लगातार मेरी चूत का रस पी रहा था।तभी मैंने उसके लंड को अपने हाथ में ले लिया और उसको मसलने लगी।
मैंने उसके लंड को पकड़ा और उठकर उसे अपने कमरे में ले जाने लगी।
मैं कहने लगी—तेरा लंड बहुत कड़क है!अब मैं उसे लंड बोलने लगी थी और मसलती जा रही थी।मोहित मेरी नंगी बॉडी देखकर शॉक्ड था।
हॉर्नी हो चुकी मैं उसके हाथ के स्पर्श से जोश में आ गई और कराहती हुई बोली—लंड तो तेरा जब तू छोटा था, तब से देख रही हूँ, लेकिन आज तेरा लंड इतना बड़ा हो गया है…
आज तुम मुझे चोद दो।मेरा इतना कहना था कि उसने मुझे पलंग पर लिटा लिया और मेरी चूत में उँगली डालने लगा। मैं गर्म तो पहले से ही थी, अब चूत में उँगली करने से और गर्म होने लगी और आह… आह… की आवाज़ करने लगी।
उसने अपनी उँगली को तेज़ी के साथ चूत में हिलाया और एक हाथ से मेरे मम्मे मसलने लगा। फिर उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया, तो मैंने पानी छोड़ दिया।
अगले ही पल उसने बिना देर किए मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया। मैं मज़े से उसके लौड़े को चूसने लगी। कुछ देर बाद वह झड़ गया और मैंने सारा माल मुँह में भरकर उसे खा लिया।
अब हम दोनों कुछ देर ऐसे ही नंगे पलंग पर पड़े रहे। कुछ देर नंगे पड़े रहने के बाद मेरी चूत में फिर से चुलबुली मचने लगी।
उसने मेरे स्तनों पर हाथ रखा तो मैंने उसके हाथ को हटाया और उसके ऊपर आकर बैठ गई।
उसका लंड मेरे चूतड़ों के बीच में फँस गया था। वह अपने दोनों हाथों से मेरे स्तनों को मसलने लगा।
अब तक मैं पुनः गर्म होने लगी थी। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके सारे शरीर को मसलना शुरू कर दिया। फिर मैं झुककर उसे किस करने लगी और अपने मम्मे उसके सीने से रगड़ने लगी।
मैं उसके गले पर, सीने पर और जिधर समझ आ रहा था, चूमती जा रही थी।कुछ ही देर में मैंने उसके पूरे शरीर को चूम-चूमकर उसे जोश से भर दिया और उसका लंड भी एकदम तनकर खड़ा हो चुका था।अब मैंने अपने हाथ से लंड को मसलना शुरू कर दिया और उसके सुपारे की चमड़ी को भी हाथ से पीछे करती हुई मुट्ठी मारने लगी।
फिर मैंने लंड को चूसना चालू कर दिया लेकिन उसकी काली लंबी झांटें मेरे मुँह में फँस रही थीं।उसने अपनी झांटों को चार महीने से क्लीन शेव नहीं किया था तो वे काफी बड़ी-बड़ी हो गई थीं।
मैं मदभरी आवाज़ में बोली—चल आज तुझे जैसा बचपन में नहलाती थी, चल वैसे ही नहलाती हूँ। तेरी झांटों को भी साफ कर दूँगी!मैंने उसे उठाया और उसके लंड को पकड़े हुए बाथरूम में ले गई।
अन्दर आकर मैंने शॉवर चालू किया और उसके शरीर पर अपना हाथ फेरना चालू कर दिया। वह भी मेरे स्तनों को मसलने लगा और मेरे शरीर पर भी हाथ फेरने लगा।कुछ देर बाद मैंने उसके शरीर पर शैम्पू लगाया और लंड पर भी लगा दिया। मैं उसके लंड की त्वचा को आगे-पीछे करते हुए उसकी मुट्ठी सी मारने लगी थी।
मैंने उसकी पूरी बॉडी को अच्छी तरह से साफ कर दिया।उसने भी मेरी पूरी बॉडी पर शैम्पू लगाकर और हाथ फेर-फेरकर साफ किया और शॉवर चालू करके हम दोनों एक-दूसरे की बॉडी को रगड़कर साफ करने लगे।
उसने मेरे शैम्पू की शीशी को उठाया, जिससे मैं अपनी चूत को साफ करती थी। उसे उसने अपने हाथ में लिया और मेरी चूत को घिसने लगा। मेरे ऊपर मदहोशी छाने लगी… मैं आह-आह करने लगी।अगले ही पल उसने मेरी चूत में उँगली घुसेड़ दी और चूत के अन्दर तक साबुन लगाने लगा। इससे मुझे हल्की-हल्की जलन सी होने लगी।
मैं मना करने लगी तो उसने अपने हाथ की एक उँगली को स्लोली-स्लोली मेरी चूत के अन्दर तक डालकर मज़ा लेने लगा।अब मुझे अच्छा लगने लगा था तो मैंने भी अपनी एक टाँग ऊपर उठा दी और उसका पूरा साथ देने लगी। फिर उसने एक रबर की पाइप को नल से लगाया और उसके दूसरे मुँह को मेरी चूत में लगा दिया।
फिर कम तेज़ धार के साथ नल की टोंटी को खोलते हुए मेरी चूत में डालने लगा।मुझे मज़ा आने लगा और इस तरह से उसने मेरी चूत को एकदम साफ कर दिया। अब तक उसका लंड हल्का ढीला हो गया था।वह मेरे नीचे बैठकर मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
मैं भी मज़े से अपनी चूत चटवा रही थी और उसके बाल पकड़कर उसे अपनी चूत पर रगड़ती हुई कामुक सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी मदभरी आवाज़ सुनकर उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा था।मैंने अपनी एक टाँग को फैलाकर ऊपर को उठा रखा था।
उसने भी मेरी चुदास को समझा और चूत के अन्दर जीभ डालकर तेज़ी से चूत को चाटने लगा। मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैं तेज़-तेज़ आहें और कराहें भरती हुई उसके सर को अपनी चूत पर रगड़ने लगी थी।उसे अत्याधिक गर्म देखकर उसने चूत से मुँह हटाया और खड़ा हो गया।
मैं कुछ समझ पाती, तब तक उसने अपने लंड को अचानक से मेरी चूत में पेल दिया।दर्द के कारण मैं हल्की सी तड़प उठी और मेरी चीख निकल गई। उसने मुझे धीरे-धीरे चोदना शुरू किया और चोदते-चोदते मेरे दूध मसलता और चूसता रहा। मुझे भी इस तरह से खड़ी अवस्था में चुदने से मज़ा आ रहा था।
मैंने उसके कंधे का सहारा लेकर अपनी टाँग को और ज्यादा फैला दिया। उसने भी तेज़-तेज़ शॉट मारे और झड़ गया। मैं हँसकर उसके सीने से लिपट गई और उसने शॉवर चालू कर दिया।हम दोनों अपने गर्म जिस्म को ठंडे पानी से ठंडा करने लगे और नहा लिया।
कुछ देर बाद उसने मुझे देखा तो मैं बोली—चित लेट जाओ, बाल साफ करने आए थे न!वह हँसते हुए फर्श पर लेट गया। मैंने उसकी झांट के बालों को साफ कर दिया और अच्छे से उसके लंड को पानी से धोकर कहा—अब खड़े हो जाओ!वह खड़ा हुआ तो मैंने उसके सारे शरीर को तौलिया से पौंछा और उसके सारे शरीर पर तेल लगाया। मैं बिल्कुल उसी तरह से कर रही थी, जैसे बचपन में उसके साथ किया करती थी।
उसके शरीर को तेल से मसाज देने के बाद मैंने उसके लंड पर भी तेल लगाया और अच्छे से उसकी मालिश की, फिर सुपारे की चमड़ी को पीछे करते हुए टॉप को खोल दिया। उसका गुलाबी टोपा मस्त लग रहा था।
मैंने उसे चूमा और उसके लंड को चूस-चूसकर वापस खड़ा कर दिया।वह बोला—ये तो खड़ा कर दिया आपने!मैं बोली—तो!उसने कहा—अब इसको बिठाओ आप!मैं बोली—चलो बिस्तर पर चलते हैं।उसने मुझे पलंग पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया। उसने अपने लंड को पहले मेरे मुँह में डाल दिया।
मैं मज़े से लंड चूसने लगी और अब मुझे झांट के बाल दिक्कत नहीं कर रहे थे।लंड चूसने के बाद वह 69 में आकर मेरी चूत में मुँह लगा लिया और मेरी चूत में जीभ को अन्दर तक डालकर मेरी चूत की मालिश करने लगा। मैं भी ‘उफ… आह…’ की आवाज़ निकालकर उसका जोश बढ़ा रही थी।
मैंने भी उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में एक-दूसरे को सुख देने लगे।कुछ देर बाद मैं बोली—अब सीधे होकर मेरी चुदाई करो!वह उठकर मुझे सीधा लिटाया और मेरी दोनों टाँगों को अपने कंधों पर रखकर मेरी कमर के नीचे तकिया लगा दिया ताकि मेरी चूत थोड़ी ऊपर को आ जाए।
फिर उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रखकर रगड़ना चालू कर दिया।मेरी चूत उसके मुँह की लार से एकदम गीली हो गई थी। मैं खुद लंड लेने को बेताब हो रही थी और अपनी चूत को लंड की तरफ ढकेल रही थी।‘उह… आह…’ की आवाज़ के साथ मैं उसे गाली देने लगी—अब कितना तड़पाओगे… जल्दी से अपना लंड डाल भी दे कमीने!
उसने भी लोहा गर्म जानकर अपना लौड़ा मेरी चूत पर सैट किया और एक झटके में अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया।
मैं दर्द से कराह उठी और उसे गाली देने लगी—साले हरामी एकदम से पेल देता है कुत्ते, दर्द होता है आह!वह रुक गया और कुछ देर चूत में डालकर रखने के बाद उसने लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
मुझे भी अब मज़ा आने लगा था और मैं भी उसका साथ दे रही थी।उसने मेरी टाँगों को फैलाया और थोड़ा और ऊपर उठाकर स्पीड को बढ़ा दिया। कमरा मेरी सिसकारियों और चट-चट की आवाज़ से भर गया था।
कुछ देर तक चूत चोदने के बाद वह मेरे मम्मों को दबाने लगा और किस करने लगा। फिर मुझे करवट देकर लिटाकर मेरे पीछे लेट गया। उसने मेरी एक टाँग को उठाया और अपने लंड को मेरी चूत में डाल दिया।मैं मस्त हो गई और वह मुझे धकापेल चोदने लगा।
साथ ही वह अपने एक हाथ से मेरे चुचे दबा रहा था। हॉट हो चुकी मैं चुदाई करवाती हुई उसे गाली दे रही थी—आह साले… इतना जोर से क्यों दबा रहा है आह मर गई!कुछ देर चुदने के बाद मैंने अपनी गाँड मरवाने की इच्छा जताई। उसने तुरंत मुझे घोड़ी बन जाने को कहा।
मैं भी झट से घोड़ी बन गई।उसने मेरी गाँड में जैल लगाया और घोड़े की तरह मेरे ऊपर चढ़ गया। उसने लंड सैट किया और मेरी गाँड मारने लगा। पहले तो मुझे थोड़ा दर्द हुआ लेकिन कुछ देर बाद उसने अपनी स्पीड कुछ ज्यादा ही बढ़ा दी। मुझे भी मज़ा आ रहा था।
कुछ देर गाँड मारने के बाद उसने लंड निकाला और पीछे से ही मेरी चूत में पेल दिया। वह मुझे धकापेल चोदने लगा। कुछ देर बाद उसने झटका दे-देकर चोदना शुरू किया तो मैं ‘आह आह’ करती हुई झड़ गई। वह भी कुछ पल के लिए रुक गया।फिर उसने मुझे सीधा लिटाकर मेरे मुँह में लंड डाल दिया।
मैं चूसने लगी। वह बोला—आंटी, हाथ से मुट्ठी मारो न!मैंने अपने हाथ से उसके लौड़े की मुठ मारनी शुरू कर दी। वह झड़ने वाला था तो मैं कहने लगी—मेरे मुँह में डाल दो!उसने मेरे मुँह में लंड डाला और मुँह में ही झड़ गया। मैंने सारा माल अपने मुँह में भर लिया और पी लिया।
उसके बाद हम दोनों नंगे ही बेड पर लेटे रहे। थोड़ी देर बाद उसका लंड फिर खड़ा होने लगा था लेकिन दो बार धकापेल चुदाई में मेरी चूत से खून आ रहा था और मुझे दर्द भी हो रहा था।उसने जबरन मेरी चूत में लंड डालना चाहा। तो मैंने मदहोशी भरी आवाज़ में कहा—अब क्या मेरी चूत को आज ही फाड़ डालेगा!
उसने हँसकर कहा—ठीक है, लेकिन मेरा लंड तनकर खड़ा है आंटी… इसके लिए तो कुछ करना पड़ेगा। मैंने कहा—मैं मुठ मार देती हूँ। पर वह तो कुछ और ही सोच रहा था।वह बेड से नीचे आकर खड़ा हुआ और मुझसे कहा—आप सीधी लेट जाओ, मेरी तरफ सर करके।
मैंने खुद ही अपना मुँह खोल दिया और गाली देकर कहने लगी—मैं समझ गई कुत्ते कि तू क्या चाहता है, आ जा कमीने अब मेरा मुँह भी चोद ले!
उसने मेरे सर को पकड़ा और लंड मेरे मुँह में डालकर मुख-चोदन करने लगा। मैं भी जीभ को लंड पर घुमाए जा रही थी, जिससे वह जोश में आकर लंड को ज्यादा अन्दर डाल देता तो मेरा उबकाई आ जाती।
कुछ देर बाद उसने कहा कि आंटी मुठ ही मार दो! तो मैंने उसको लिटाया और उसके लंड को मुँह में भरकर चूसने लगी और लंड को अपने मुँह की लार से तर कर दिया।
फिर तेज़ी से मुठ मारती हुई बोली—जब तू छोटा था तो तेरा लंड मेरी छोटी उँगली जितना था और आज बालिश्त भर का हो गया है।वह हँस दिया। मैंने लंड चूसने की स्पीड बढ़ा दी और वह भी झड़ गया।उस दिन मैं सारी रात मोहित के साथ नंगी ही लेटी रही