जब अगली सुबह दरवाजे की घंटी बजी, तो मैं नंगी ही रहकर दरवाजा खोलने चली गई। जैसे ही बाहर झाँका, मेरे तो होश ही उड़ गए।
बाहर खड़ा था विनय—बड़े बॉस का बेटा।
मैंने जैसे ही उसे देखा, तुरंत दरवाज़ा बंद कर दिया। उसकी सूरत देखकर मेरी साँसें तेज़-तेज़ चलने लगीं, चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं गेट से चिपककर बिल्कुल नंगी खड़ी थी और विनय बाहर से आवाज़ दे रहा था।
मैंने खुद पर काबू पाया, गाउन पहनकर गेट खोला। बड़े बॉस बेडरूम में सो रहे थे, उनको कुछ पता नहीं चला।
“हैलो विनय… कैसे हो तुम?”
“मैं अच्छा हूँ… तुम कैसी हो? बहुत दिनों से ऑफिस नहीं आई, तो मुझे लगा तुम्हारी तबीयत ज्यादा खराब है।”
“नहीं… मैं अब ठीक हूँ। पहले थोड़ी खराब थी।”
“ओह, फिर तो अच्छी बात है।”
मैं भूल गई कि विनय गेट पर ही खड़ा है। मुझे उसे अंदर बुलाकर चाय-कॉफी पूछनी चाहिए थी।
“ठीक है… मैं जाता हूँ। सॉरी, तुमको डिस्टर्ब किया।”
“नहीं… कोई बात नहीं विनय। मैं सो रही थी और तुम आए, तो जल्दी में गेट खोलने आ गई।”
हम एक-दूसरे को देख रहे थे। फिर विनय की नज़रें मेरे मम्मों पर टिक गईं, जो गाउन की दरारों से झाँक रहे थे।
“आओ ना विनय… चाय पीकर जाना।”
“नहीं, तुम परेशान मत हो।”
“परेशानी कैसी? तुम्हारे बहाने मैं भी पी लूँगी।”
विनय थोड़ा नानुकर के बाद मान गया और अंदर आकर सोफे पर बैठ गया। मैं उसके लिए पानी लेकर आई और झुककर देने लगी। विनय की आँखें पूरी खुलकर मेरे गाउन के भीतर झाँकने लगीं। मेरी चुचियों का साइज़ अब 42 हो गया था। विनय को मेरी बढ़ी हुई चुचियाँ देखकर खुशी मिल रही थी।
मैंने मजा लेने के लिए कहा, “चलो, अब पानी को वापस रख देती हूँ।”
विनय जैसे नींद से जागा हो, झेंपते हुए बोला, “क…क्या?”
“अब तुमको पानी की जरूरत नहीं है ना?”
“क्यों?”
“तुम्हारी प्यास तो अंदर झाँककर मिट गई होगी।”
विनय शर्माकर नीचे देखने लगा। मैं हँसते हुए बोली, “अरे, मैं तो मजाक कर रही थी। लो, तुम पानी पी लो।” अपने मम्मों को सहलाते हुए कहा, “ये इतने बड़े हो गए हैं न… इसलिए अपने-आप दिख जाते हैं।”
“नहीं, अभी इतने भी बड़े नहीं हुए हैं।”
“तुमको कैसे पता, मेरे पहले कितने बड़े थे?”
विनय फिर शर्माकर दूसरी तरफ देखने लगा। मैं चाय बनाने किचन में चली गई। चाय गैस पर रख दी और सोचने लगी—काश विनय आकर मुझे पीछे से पकड़ ले, जोर-जोर से मेरी चुचियों को मसल दे, अपनी बाँहों में लेकर मेरी चूत में लंड घुसा दे और बोले, “रंडी, तेरी चुचियों से पूरा शहर दूध पिएगा, इनको इतना बड़ा कर दूँगा।”
ये सोचते-सोचते मेरे हाथ अपने-आप मेरी चूत पर लग गए। मैं गाउन हटाकर चूत में उँगली घुसेड़ने लगी।
काफी देर बाद विनय किचन में आ गया। मेरा गाउन खुला हुआ था, एक टाँग किचन की स्लैब पर रखी हुई। मैं आँखें बंद करके अपनी चुचियों को मसल रही थी और बुदबुदा रही थी, “आह… विनय, फक मी… आहह, फक मी हार्डर…”
“कामिनी, ये क्या कर रही हो?”
अचानक विनय की आवाज़ सुनकर मैं चौंक उठी और पीछे मुड़कर देखा। विनय की नज़रें मेरे नंगे जिस्म पर थीं—तनी हुई चुचियों और खुली चूत को वो बड़े ध्यान से देख रहा था।
मैं गाउन ठीक करते हुए बोली, “ओह… सॉरी विनय… मैं शायद कहीं खो गई थी। तुम बैठो, मैं अभी आती हूँ।”
विनय मेरे करीब आने लगा। मैंने देखा, उसका लंड बिल्कुल टाइट होकर पैंट में उभार बना रहा है। वो मेरे पास आकर कान में धीरे से बोला, “कामिनी, तुम अंदर से बहुत खूबसूरत हो।”
मैं शर्माकर जड़ हो गई। विनय ने मेरे होंठों को चूमा और बाहर हॉल में चला गया।
थोड़ी देर बाद मैं चाय लेकर बाहर आई। अब मैं समझ गई थी कि विनय दोबारा मुझे चोदना चाहता है। इसलिए अब मैं ज्यादा नहीं शर्मा रही थी। मैंने झुककर चाय टेबल पर रखी और विनय को अपनी चुचियाँ दिखाई। फिर उसके सामने पैर पर पैर रखकर बैठ गई, ताकि मेरी नंगी जाँघ दिख जाए और उसका लंड टाइट बना रहे।
“कामिनी, तुम ऑफिस नहीं आती हो तो मन नहीं लगता।”
“क्यों? क्या तुम ऑफिस मुझे देखने आते हो?”
“अरे नहीं… बस तुमको देखकर अच्छा लगता है।”
“और क्या-क्या अच्छा लगता है तुमको?”
विनय की नज़र मेरी नंगी जाँघों पर थी, लंड पूरा टाइट। उसने जवाब नहीं दिया तो मैंने चिढ़ाया, “तुम्हारे पैंट का तंबू देखकर पता चल गया कि तुमको मेरा क्या-क्या अच्छा लगता है।”
विनय झेंप गया, कुशन गोद में रखते हुए बोला, “अरे नहीं… सॉरी… मैं कुछ सोचने लगा था।”
“मेरे पैरों को देखते हुए क्या सोचने लगे थे?”
“वो… कुछ नहीं… आजकल तुम्हारे बिना पापा भी बहुत परेशान रहते हैं।”
मुझे तुरंत याद आया—बड़े बॉस तो बेडरूम में सोए हैं। कहीं विनय ने देख लिया तो क्या सोचेगा।
“ठीक है, अब कल से ऑफिस आऊँगी। मुझे अभी काम है, कल मिलते हैं।”
विनय जाने को हुआ। गेट पर मैं उसके साथ गई। विनय ने मुझे गले लगाया और मेरे चूतड़ों को दबाया। मैंने इग्नोर कर दिया क्योंकि अब मैं उसे जल्दी भेजना चाहती थी।
जैसे ही मैंने गेट खोला, पीछे से आवाज़ आई—“अरे विनय, तुम कब आए?”
हम दोनों पीछे मुड़े। बड़े बॉस सिर्फ एक छोटी सी फ्रेंची में बेडरूम के गेट पर खड़े थे।
विनय शॉक्ड होते हुए—“पापा…!”
मैं कुछ बोलने की हालत में नहीं थी। बड़े बॉस ने विनय को बुलाया और बैठने को कहा। मैं चाय का कप लेकर किचन में चली गई।
इतने में बड़े बॉस आकर मुझे पीछे से पकड़ लिया, मेरी गर्दन पर चूमते हुए गाउन में हाथ डाल दिया और मेरी चुचियों को मसलने लगे।
“सर… विनय आ जाएगा।”
“वो जानता है कि तुम मेरी हो। मेरा बेटा है वो।”
“फिर भी सर, उसके सामने ये सब कैसे?”
बड़े बॉस ने मुझे छोड़ दिया। मैं भी पीछे-पीछे आकर बैठ गई।
बड़े बॉस ने विनय से पूछा, “विनय, तुम दारू पीते हो?”
“हाँ पापा, कभी-कभी… पर रात में।”
“ठीक है, अभी मेरे लिए लेकर आओगे?”
“ओके पापा।”
वो जाने लगा तो बड़े बॉस ने उसे रोका और पैसे दिए। विनय पैसे लेकर चला गया।
उसके जाते ही बड़े बॉस मेरे पास आए, मेरे चेहरे को पकड़कर किस कर लिया।
“सर, आप पहले ब्रश कर लीजिए, तब तक मैं आपके लिए चाय लाती हूँ।”
मैं किचन में चली गई। बड़े बॉस ने ब्रश कर लिया और सोफे पर बैठ गए। मैं चाय देकर उनके बगल में बैठी तो उन्होंने मुझे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया। गाउन हटाकर मेरे निप्पलों को चूसने लगे और चाय भी पीने लगे।
मैंने मसखरी की, “दूध कम लग रहा है क्या चाय में?”
“नहीं मेरी जान, पर तेरी चुचियों में कुछ नशा सा है।”
मैं मुस्कुराकर निप्पल चुसवा रही थी। गेट खुला था, डर था कोई आ न जाए। फिर बड़े बॉस जोर-जोर से निप्पलों को काटने लगे और मेरी चूत रगड़ने लगे।
उन्होंने मुझे गोद से उतारा, गाउन निकाल दिया। मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी हो गई। मैंने एक टाँग उनके कंधे पर रख दी। बड़े बॉस ने मेरी चूत में मुँह डाल दिया, जीभ से चाटने लगे। चूत पर जुबान का टच मिलते ही मेरी आँखें बंद हो गईं। फिर उन्होंने मुझे घुमा दिया। मैं टेबल पर हाथ रखकर झुक गई। अब उनकी जीभ मेरी गाँड की छेद चाट रही थी—जिसे कल रात उन्होंने अपने लंड से फैला दिया था।
मैं मजे से गाँड चटवा रही थी। फिर बड़े बॉस खड़े हो गए, लंड निकालकर बिना बताए मेरी गाँड में घुसा दिया।
“आहह सर… पहले बोल तो देते… आह, सीधा गाँड में लंड घुसा दिया। प्लीज रुको… थोड़ी देर मेरी गाँड में अपने लंड को फँसाकर यूँ ही रखो।”
“साली, कल रात तो बहुत जोर-जोर से गाँड मरवा रही थी। अभी तेरी गाँड को फाड़कर चौड़ा कर दूँगा। रंडी बनेगी साली… आह ले…”
मुझे गाली सुनकर चुदना बहुत अच्छा लगता है। मैं नॉर्मल होकर गाँड मरवाने लगी। बड़े बॉस जोर-जोर से लंड अंदर तक घुसा देते, फिर निकालकर छेद पर ठोक देते।
“सर, चूत में घुसा दो, बहुत खुजली हो रही है।”
“ले मादरचोद रंडी… तेरी चूत और गाँड दोनों में एक साथ लंड घुसेगा, तब तेरी प्यास बुझेगी… भोसड़ी वाली।”
उन्होंने पीछे से ही लंड चूत में पेल दिया। मैं सोच रही थी—काश दो लंड एक साथ गाँड और चूत में चलते। ये सोचकर ही मेरी चूत पानी निकालने को हो गई।
बड़े बॉस ने गति बढ़ा दी, मेरे ऊपर झुककर चुचियों को पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगे। मैं आह-आह करके चुदवा रही थी। घोड़ी बनकर लंड ले रही थी।
जब उनका लंड लावा निकालने वाला था, उन्होंने निकालकर मेरी गाँड में घुसेड़ दिया और जोर-जोर से पानी निकालने लगे।
“साली रंडी, तेरी गाँड मस्त है।”
मैंने भी गर्म वीर्य पाकर चूत खोल दी। उनका रस मेरी जाँघों पर चूने लगा।
तभी दरवाजा खुलने की आवाज़ आई।
मैं नंगी, बड़े बॉस का लंड अपनी गाँड में लेकर झुकी हुई थी। हमने पीछे मुड़कर देखा—विनय दारू लेकर आ गया था और हम दोनों को देख रहा था।
मैं जल्दी से गाउन उठाकर बाथरूम की तरफ भागी। बड़े बॉस का लंड गप की आवाज़ के साथ निकला, ढेर सारा वीर्य जाँघ पर बहने लगा, कुछ जमीन पर भी गिर गया।
बड़े बॉस ने लंड फ्रेंची में घुसा लिया, सोफे पर बैठकर ऊपर मेरा गाउन डाल दिया। विनय को अपने सामने बिठा लिया ताकि वो मेरी तरफ न देख पाए।
मैं बाथरूम में नहाने चली गई। नहाकर नंगी ही बाहर आई। बड़े बॉस का चेहरा मेरी तरफ था, विनय की पीठ मेरी तरफ। बड़े बॉस मुझे नंगी देखकर अपना लंड सहला रहे थे।
मैंने बेडरूम जाकर मिनी टॉप और छोटी स्कर्ट पहन ली। ब्रा नहीं मिली, इसलिए बिना ब्रा के टॉप पहना। निप्पल साफ दिख रहे थे।
मैं बड़े बॉस के पास आई। उन्होंने दारू की बोतल खोल ली थी। मुझे देखकर बोले, “कामिनी, कुछ चखना ला।”
मैं किचन में जाकर बनाकर ले आई।
“कामिनी, तुम सिर्फ मेरे लिए ही गिलास क्यों लाई? विनय और तुम नहीं पियोगे क्या?”
“सर, मैं नहीं पियूँगी।”
“पापा, मैं भी नहीं।”
“मेरा साथ तो देना पड़ेगा… चाहो तो थोड़ा सा ही पियो।”
बड़े बॉस बहुत जिद करने लगे तो मैंने तीनों के लिए गिलास ला दिए। हम तीनों दारू पीने लगे।
विनय शायद ज्यादा नहीं पीता था, इसलिए तीन पैग में ही चढ़ने लगी। मैंने और बड़े बॉस ने पाँच-पाँच पैग पी लिए।
बड़े बॉस ने मुझे अपने पास बिठा लिया, कमर में हाथ डालकर पैग बनाने को कहा। मैं झुककर पैग बना रही थी, विनय मेरे टॉप के अंदर देख रहा था। उसका लंड भी गर्मी महसूस करने लगा, पैंट के ऊपर से दिखने लगा।
मैंने विनय के लिए भी पैग बना दिया। अब बड़े बॉस मेरे चुचियों को टॉप के ऊपर से मसल रहे थे और दारू पी रहे थे। विनय ध्यान से देख रहा था। दोनों के लंड खड़े हो गए। मुझे सोचकर बहुत अच्छा लग रहा था कि मुझे देखकर दो मर्दों के लंड खड़े हैं—पापा और बेटा।
तभी बड़े बॉस ने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया। मैं सहलाने लगी। दारू पीने के बाद मैं भी होश खो रही थी। उन्होंने मुँह में दारू भरकर मेरे मुँह में डाल दिया। मैं पी गई और उनके होंठ चूसने लगी।
बड़े बॉस ने मेरी गर्दन पकड़कर झुका दिया। मैंने उनका लंड फ्रेंची से बाहर निकालकर चूसना शुरू कर दिया। विनय देख रहा था कि कैसे मैं उसके पापा का लंड चूस रही हूँ।
बड़े बॉस आँखें बंद करके मेरे मुँह में लंड घुसाकर मजे ले रहे थे। तभी मैंने देखा—विनय ने भी अपना लंड बाहर निकाल लिया था और हिला रहा था।
मैंने इशारे से विनय को अपने पीछे बिठा लिया। बड़े बॉस का लंड चूसते हुए विनय का लंड हिलाने लगी। विनय पीछे से मेरा टॉप उठाकर चुचियाँ मसलने लगा।
दो मर्दों के बीच—पापा और बेटा के बीच—मैं स्वर्ग की सैर कर रही थी।
विनय ने टी-शर्ट निकाल दी। मैंने उसके पैंट खोल दिए। उसने वो भी निकाल दिए। विनय मेरी स्कर्ट ऊपर उठाकर जाँघों को सहला रहा था, फिर झुककर चाट रहा था।
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने बड़े बॉस का लंड मुँह में और जकड़ लिया। उन्होंने मेरे सर को पकड़कर पूरा गले तक घुसा दिया। मुझे खाँसी आई तो उन्होंने छोड़ा। अब मेरी चूत में खुजली हो रही थी, पानी निकलने को बेताब था।
मैं उठी, टॉप उतार दिया। विनय ने जल्दी से मेरी स्कर्ट के साथ पैंटी निकाल दी। अब मैं पूरी नंगी हो गई।
मैंने बड़े बॉस की फ्रेंची निकाल दी, टाँगें फैला दीं और उनका लंड चूत में घुसाकर बैठ गई।
“आअह्ह्ह… मजा आ गया सर… क्या कड़क लंड है आपका!”
विनय भी पूरा नंगा हो गया। नीचे बैठकर मेरी गाँड चाट रहा था। मेरी गाँड पर बेटे की जीभ, चूत में पापा का लंड।
मैंने बड़े बॉस के कान में धीरे कहा, “आज तो आपका बेटा मेरी गाँड मारकर ही मानेगा।”
बड़े बॉस ने आँखें खोलकर देखा। विनय मन लगाकर गाँड चाट रहा था। उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, “दो-दो लंड एक साथ लगी रंडी?”
मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। मैंने मुस्कुराकर उनके मुँह में मुँह डाल दिया।
अब मैं बड़े बॉस के होंठ चूस रही थी, उनका लंड चूत में लिए बैठी थी। विनय मेरी गाँड में जीभ डालकर दो उंगलियाँ घुसा रहा था, गाँड मुलायम हो रही थी।
मैंने विनय का हाथ पकड़कर ऊपर खींचा, उसका लंड थोड़ी देर मुँह में लेकर चूस लिया। लार से गीला हो गया। मैंने मुस्कुराकर देखा। वो समझ गया।
विनय पीछे आकर लंड मेरी गाँड के छेद पर रगड़ने लगा। धीरे-धीरे घुसने लगा।
“उम्म्ह… अहह… हय… याह… धीरे प्लीज।”
बड़े बॉस ने मेरे चूतड़ों को फैला दिया ताकि विनय का लंड आसानी से घुस जाए।
अब मेरी चूत और गाँड दोनों में लंड पूरी तरह घुस चुके थे। विनय पीछे से चुचियाँ पकड़कर जोर-जोर से मसल रहा था, धीरे-धीरे गाँड मार रहा था। चूत में भी लंड अंदर-बाहर हो रहा था।
मैं दो नंगे मर्दों के बीच नंगी दबी हुई थी, दो-दो लंड अंदर घुसवा रही थी। बड़े बॉस ने मेरे मुँह में मुँह डालकर कमर तेज चलाई। गाँड में भी जल्दी-जल्दी लंड घुसने लगा।
“आअह्ह्ह आह्ह्ह सर जोर से चोदो मेरी चूत को… आह्ह… बड़ा मजा आ रहा है। विनय आज मेरी गाँड को पूरा फाड़ दो… प्लीज विनय।”
“ले साली और तेज… तेरी गाँड और चूत दोनों में लंड घुस रहे हैं साली रंडी।”
“आह आह आह्ह्ह मजा आ रहा है सर… पहले क्यों नहीं चोदा दोनों ने मिलकर… आह… मैं आज से दोनों की रंडी हूँ… चोदो मुझे… आह्ह्ह आह्ह्ह मजा आ रहा है और जोर से।”
विनय पूरी रफ्तार में गाँड मार रहा था। बड़े बॉस का लंड जोर-जोर से चूत में घुस रहा था।
“मुझे तेरी चूत लेनी है कामिनी रानी… बोल तो घुसा दूँ चूत में तेरे।”
“अभी नहीं… गाँड मारो मेरी जोर-जोर से।”
मैंने सोचा—एक साथ दो लंड चूत में घुस गए तो चूत फट जाएगी।
विनय ने चार धक्के और लगाए, फिर लंड निकालकर सोफे पर बैठ गया। मैं गुस्से से देखने लगी। उसका लंड अभी टाइट खड़ा था। मैं बड़े बॉस के लंड से उठी और विनय का लंड चूत में लेकर बैठ गई। बड़े बॉस पीछे से आए, उनका लंड मेरी गाँड में घुस गया।
मैं विनय को देख रही थी, वो मुझे। दोनों छेदों में दो लंड मेरी चूत-गाँड फाड़ रहे थे।
मैं विनय को किस करने लगी, उसका हाथ चुचियों पर रख लिया। विनय जोर-जोर से मसलने लगा, होंठ चूसते हुए चोद रहा था। बड़े बॉस गाँड में लंड घुसाए दारू पी रहे थे। फिर विनय ने मुझे बाँहों में कस लिया और खड़ा होने लगा।
बड़े बॉस और विनय दोनों ने खड़े होकर मुझे हाथों में उठा लिया। मुझे उछाल-उछालकर चूत-गाँड फाड़ना शुरू कर दिया।
“आअह्ह आह्ह्ह मजा आ रहा है आहह… जोर से उछाल दो मुझे।”
मैं ऊपर जाती, नीचे आती, गप के साथ दो-दो लंड पर बैठ जाती। सीधा अंदर तक घुस जाते। मैं जन्नत की सैर कर रही थी।
“साली रांड… हमेशा ऐसे ही चुदवाया कर।”
“मस्त माल है साली… नंगी होकर तो और मस्त हो जाती है। इसको देखकर लंड हमेशा खड़ा ही रहता है।”
“आह्ह्ह आह्ह्ह मजा आ रहा है… और जोर से… सालों मुझे नंगा करके चोद रहे हो… आह रंडी बना दिया मुझे… आह्ह्ह… मस्त लंड है दोनों के… जोर से और जोर से।”
“ले साली रांड मादरचोद और ले साली।”
दोनों के एक-एक हाथ जोर-जोर से मेरी चुचियाँ मसल रहे थे। मैं कितनी बार पानी निकाल चुकी थी, पता ही नहीं चला।
“कामिनी रंडी, लंड का पानी कहाँ निकालूँ… पिएगी मादरचोद?”
“हाँ साली, बता तेरी गाँड को भर दूँ या प्यास बुझाएगी अपनी?”
“भर दो मेरी गाँड और चूत को पूरा… एक भी बूँद बाहर मत निकालना… आह्ह्ह मैं भी निकाल दूँगी अपना… आह्ह्ह आह्ह्ह मजा आ गया सर जोर से गाँड फाड़िए अपने रंडी की… आह और जोर से।”
दोनों के लंड फूलने लगे। वीर्य मेरी चूत और गाँड में भरने लगा। गर्म-गर्म वीर्य अंदर भर गया।
“सर, मुझे बाथरूम में ले जाकर ही लंड बाहर निकालना, नहीं तो पूरा बाहर गिरेगा और मुझे साफ करना पड़ेगा।”
बड़े बॉस और विनय लंड घुसाए ही मुझे बाथरूम ले गए। फिर गप की आवाज़ के साथ दोनों का लंड बाहर निकला। ढेर सारा सफेद वीर्य मेरी जाँघ पर चिपककर चू रहा था।
मैं नीचे बैठकर दोनों का लंड चूसने लगी। वीर्य की मलाई जीभ से चाट रही थी।
“कामिनी रानी, मूत पिएगी?”
मैंने मुस्कुराकर देखा और मुँह खोलकर इंतजार करने लगी। बड़े बॉस ने लंड पकड़कर मेरे मुँह में मूतना शुरू कर दिया। मैं पी रही थी। ये देखकर विनय को भी मूत आ गई। वो भी मेरे चेहरे पर मूतने लगा। मैं दो-दो लोगों के मूत से नहा रही थी, पी रही थी। मुझे अच्छा लग रहा था।
फिर दोनों के लंड धो दिए। दोनों नंगे बाहर चले गए। मैं दोबारा नहाने लगी। नहाकर सिर्फ तौलिया लपेटकर बाहर आई।
बड़े बॉस और विनय दोनों जाने के लिए रेडी हो गए थे। बड़े बॉस को कुछ जरूरी काम था। विनय ने भी अपना काम कर लिया था। मैंने दोनों को अच्छे से किस किया। दोनों ने तौलिया हटाकर मेरी चूत चूम ली और जल्दी मिलने को कहा।
फिर मैं नंगी होकर सो गई। नींद सीधी शाम को खुली। कोई दरवाजे पर डोरबेल बजा रहा था।