करीब 10-12 किलोमीटर दूर जंगल का हाईवे लग गया था। रात का अंधेरा गहरा चुका था, पेड़ों की घनी छाया सड़क पर नाच रही थी। थोड़ी देर चलने के बाद मेरी कार में से अजीब सी कर्कश आवाज़ आने लगी। फिर एक जोरदार धमाके के साथ मेरा टायर पंचर हो गया। मैंने गाड़ी हाईवे के साइड पर लगा दी। इंजन बंद करते ही चारों तरफ सन्नाटा छा गया। सिर्फ़ हवा में पेड़ों की सरसराहट और दूर कहीं किसी उल्लू की आवाज़। अब मैं सुनसान सड़क पर अकेली थी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। डर की ठंडी लहरें मेरी रीढ़ से गुजर रही थीं। मोबाइल बिल्कुल डिस्चार्ज पड़ा था। पति को फोन भी नहीं लगा सकती थी।
मैं कार में ही बैठी रही, ठंड लगने लगी थी। दो घंटे बीत गए… कोई ट्रक, कोई बस, कोई सवारी नहीं आई। मौसम और ठंडा हो गया था। तभी मेरी नज़र जंगल की तरफ गई। कुछ दूरी पर आग की लपटें चमक रही थीं। दिल ने कहा—शायद कोई होगा, मदद कर देगा। लेकिन डर भी लग रहा था। थोड़ी देर हिम्मत जुटाई, फिर कार का दरवाज़ा खोला और धीरे-धीरे उस तरफ चल दी। पेड़ों के पीछे छिपते हुए आगे बढ़ी। जब करीब पहुँची तो देखा—पाँच मर्द आग जलाकर बैठे हैं।
लकड़ियों का बड़ा ढेर लगा था, उसके पीछे उनका ट्रक खड़ा था। एक छोटी सी झोपड़ी भी थी। वे सभी हट्टे-कट्टे, सांवले रंग के थे। कमर में लुंगियाँ बाँधे हुए। लुंगियों के नीचे उनके मोटे-मोटे लंड के उभार साफ दिख रहे थे। मेरी नज़र उन उभारों पर अटक गई। अचानक मेरी चूत में एक अजीब सी गर्मी फैल गई। मैंने सोचा… इन्हीं से… आज रात इन्हीं से चुदवाऊँ।
मैं बाहर निकल आई। पाँचों की नज़र मुझ पर पड़ गई। एक ने कहा, “मेमसाब, आप कौन हो? इस जंगल में क्या कर रही हो?” मैंने जवाब दिया, “मैं हाईवे से जा रही थी। कार खराब हो गई। आज पड़ोस के शहर जाना है। मदद कर दो तो अच्छा होगा।” एक दूसरे ने सिर हिलाया, “इतनी रात को मिस्त्री नहीं मिलेगा। बस-गाड़ी भी नहीं आएगी। आज रात यहीं ठहर जाओ। सुबह बस में बैठ जाना।” मेरे पास और कोई चारा नहीं था। मैंने हाँ कह दी।
एक ने मुझे लकड़ी के बड़े लट्ठे पर बैठने को कहा। मैं बैठ गई। बातचीत शुरू हुई। वे जंगल से लकड़ियाँ काटकर शहर में बेचते थे। मैंने बताया कि मेरे पति पुलिस ऑफिसर हैं, मैं उन्हीं से मिलने जा रही हूँ। दो मर्द उठकर झोपड़ी में चले गए। सिर्फ़ तीन रह गए। उनमें से एक लगातार मेरे तने हुए मम्मों को घूर रहा था।
मेरी नज़र उसके लुंगी के उभार पर गई। लंड इतना मोटा और लंबा लग रहा था कि लुंगी में साफ-साफ दिख रहा था। मेरी चूत में आग लग गई। मैंने जानबूझकर अपने मम्मों को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया, जैसे खुजली हो रही हो। उसकी निगाहें और गरम हो गईं। थोड़ी देर में वह मेरे बगल में आकर बैठ गया। उसकी साँसें भारी थीं।
उसने धीरे से हाथ मेरी जाँघ पर रखा। मैं चुप रही। वह जाँघों को सहलाने लगा—धीरे-धीरे ऊपर की तरफ। मैंने पैर थोड़े खोल दिए। उसकी उंगलियाँ मेरी पैंट के ऊपर से ही चूत पर फिरने लगीं। फिर उसने पैंट के अंदर हाथ डाल दिया। मेरी गीली चूत पर उंगली फिराने लगा। दो उंगलियाँ अंदर घुस गईं। बाकी दोनों भी पास आ गए। एक ने मेरे मम्मों को जोर से दबाना शुरू कर दिया, दूसरे ने मेरे होंठों पर मुँह रख दिया और जोर-जोर से चूमने लगा।
मैं गर्म हो चुकी थी। उन्होंने मुझे खड़ा किया और एक-एक करके मेरे सारे कपड़े उतार डाले। ब्लाउज, ब्रा, पैंट, पैंटी… सब। अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। ठंडी हवा मेरे नंगे शरीर पर लग रही थी, लेकिन अंदर आग जल रही थी। एक मर्द झोपड़ी में गया और बाकी दो को भी बुला लाया। अब पाँचों मेरे सामने खड़े थे। उन्होंने अपनी लुंगियाँ खोल दीं। पाँच मोटे, काले, नसों से भरे लंड बाहर निकल आए। कुछ तो इतने मोटे थे कि मुट्ठी में भी पूरी तरह नहीं आ सकते थे। वे अपने लंड सहलाते हुए मुठ मारने लगे। मेरे मुँह में पानी आ गया।
जब पाँचों ने मुझे नंगा कर दिया तो मेरी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। ठंडी हवा मेरे तने हुए मम्मों पर लग रही थी, निप्पल्स सख्त हो गए थे। मैं खाट पर लेटी और टाँगें जितनी खोल सकती थी, खोल दीं। मेरी चूत पहले से ही भीगी हुई थी, होंठ फूलकर बाहर निकले हुए थे। पहले वाले ने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया। उसकी मोटी जीभ ने मेरे क्लिट को धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। फिर जोर से चूसा। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए। “आह्ह… और अंदर…”
उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस गई, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ घुमाते हुए चाटने लगा। बाकी चार मेरे शरीर पर झुक गए। दो मेरे मम्मों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगे, दाँत से निप्पल्स को हल्के से काट रहे थे। एक मेरे गालों और गर्दन को चाट रहा था, दूसरा मेरे कान में साँस छोड़ते हुए गंदी-गंदी बातें कर रहा था। फिर पहला मर्द खड़ा हुआ। उसका लंड इतना मोटा था कि मेरी चूत के होंठ उसके सर को छूते ही फैल गए। उसने एक जोरदार धक्का मारा। “उम्म्ह… अहह… हय्य…!”
मेरी आँखें बंद हो गईं। चूत फटती हुई सी लगी, लेकिन दर्द के साथ एक गहरी खुशी भी फैल गई। उसने पूरा लंड अंदर तक धकेल दिया। उसके अंडे मेरी गाँड से टकरा रहे थे। वह जोर-जोर से हिलने लगा—लंबे-लंबे धक्के। हर धक्के पर मेरी चूत की दीवारें उसके मोटे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। उसी समय दूसरे ने अपना लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया। मैं दोनों तरफ से भरी हुई थी—मुँह में एक, चूत में एक। पाँच मिनट बाद दर्द पूरी तरह गायब हो गया और सिर्फ़ भूख रह गई।
मैं खुद कूल्हे हिलाने लगी। उसने बिना झड़े निकाला तो तुरंत तीसरा आ गया। उसका लंड थोड़ा लंबा और टेढ़ा था। वह अंदर जाते ही मेरी गर्भ के मुँह को छू रहा था। मैं चीख उठी। वह और तेज़ चोदने लगा। मेरे मम्मों को दोनों हाथों से दबाते हुए धक्के मार रहा था। फिर उन्होंने मुझे ऊपर खींच लिया। एक मर्द खाट पर लेट गया। मैं उसकी छाती पर चढ़ गई और अपना चूत उसके खड़े लंड पर बैठा दी। पूरा लंड अंदर चला गया। मैं उछल-उछल कर चोदने लगी—ऊपर-नीचे, आगे-पीछे। मेरी गीली चूत की आवाज़ “च्चप-च्चप” कर रही थी। तभी दूसरा पीछे से आया। उसने अपनी मोटी उंगलियों से मेरी गाँड के छेद को पहले गीला किया, फिर अपना लंड वहाँ रख दिया। एक जोर का धक्का…
“आआह्ह… माँ…” गाँड फटती हुई लगी, लेकिन वह धीरे-धीरे पूरा अंदर ले आया। अब मैं दोनों के बीच सैंडविच बन गई थी। एक चूत में, एक गाँड में। दोनों एक साथ धक्के मारने लगे—एक अंदर जाता तो दूसरा बाहर, फिर उल्टा। मेरा शरीर उनके बीच पिसती जा रही थी। इतना गहरा, इतना भरा हुआ अहसास पहले कभी नहीं हुआ था। मैं पागलों की तरह कराह रही थी। बाकी तीन मेरे मुँह और हाथों में अपने लंड दे रहे थे। मैं एक-एक करके सबको चूस रही थी—जीभ से नसें चाट रही थी, अंडकोष मुँह में ले रही थी। उनकी साँसें भारी हो रही थीं। दो घंटे तक यही सिलसिला चला।
कभी मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से दोनों छेदों में एक साथ, कभी मुझे दीवार की तरफ करके एक के ऊपर एक चोदते हुए, कभी मुझे घुटनों के बल बैठाकर तीन लंड एक साथ मुँह में ठूँसते हुए। मेरी चूत और गाँड दोनों पूरी तरह खुल चुकी थीं, रस बह रहा था। मैं कई बार झड़ चुकी थी—हर बार शरीर काँप उठता था, चूत जोर-जोर से धड़कती थी। आखिर में जब सबके लंड और सख्त हो गए तो उन्होंने मुझे खाट पर लिटा दिया।
एक-एक करके मेरे मुँह में आकर झड़ने लगे। गाढ़ा, गर्म, नमकीन वीर्य मेरे मुँह में भरता जा रहा था। मैं निगलती रही। पाँचों का रस मैंने पूरा पी लिया। कुछ मेरे मम्मों पर और चूत पर भी गिर गया। रात में उन्होंने मुझे तीन बार पूरी तरह से चोदा। हर बार पहले चूत, फिर गाँड, फिर मुँह। मेरी जाँघों के बीच सफेदी चमक रही थी, होंठ सूज गए थे, गर्दन और मम्मों पर काट और चूसने के निशान पड़ गए थे।
सुबह जब रोशनी आई तो मेरा शरीर पूरी तरह थका हुआ था… लेकिन अंदर एक अजीब सी तृप्ति थी। एक मर्द पड़ोस के शहर से मैकेनिक बुला लाया। उसने मेरी कार ठीक की और चला गया। जब मैं तैयार होने लगी तो एक ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेमसाहब, कभी भी चूत में आग लगे तो हमें बुला लेना। हम ठंडा कर देंगे।” उसने अपना नंबर मेरी हथेली पर लिख दिया। फिर पाँचों अपने ट्रक में बैठकर चले गए। मैं कार में बैठी, आईना देखा। मेरे होंठ सूजे हुए थे, गर्दन पर काट के निशान थे, और जाँघों के बीच अभी भी उनका रस रिस रहा था। मैं मुस्कुराई… और गाड़ी स्टार्ट कर दी।
कामिनी के नाम आपकी पाती
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