गिर के जंगलों का सफर — हाईवे की रवानगी
CHAPTER 17 Travel Encounters

गिर के जंगलों का सफर — हाईवे की रवानगी

Road Trip to Gir Forest: 100 km/h Desires
"हाईवे पर गाड़ी 100 की स्पीड से दौड़ रही थी, और उसके हाथ मेरी नाइटी के अंदर..."
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आज मैं बहुत खुश थी। मैं और मेरा भांजा छुट्टियाँ मनाने के लिए गिर जा रहे थे। मैंने एक टाइट, काली टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें मेरे 42 इंच के भारी स्तन उभरे हुए साफ़ नजर आ रहे थे, मेरे निप्पल्स कपड़े से बाहर उभर रहे थे। मैंने जानबूझकर न ब्रा पहनी थी, न ही पैंटी। नीचे एक छोटी सी लाल स्कर्ट थी, जो मेरी जांघों को मुश्किल से ढक रही थी, हवा का एक झोंका भी मेरी चूत को बेपर्दा कर देता। भांजे ने ग्रे टी-शर्ट और ढीली ट्रैक पैंट पहनी थी, और उसने भी चड्डी नहीं पहनी थी, जो उसका उभार देखकर साफ़ पता चल रहा था। गाड़ी में पुराने रोमांटिक गाने बज रहे थे, "दिल तो पागल है..." की धुन मेरे दिल में आग लगा रही थी।

हाईवे पर गाड़ी 100 की स्पीड से दौड़ रही थी। अचानक भांजे ने मुझे देखा, उसकी आँखों में शरारत और वासना की चमक थी। उसने धीरे से अपना दायाँ हाथ मेरी स्कर्ट के नीचे सरकाया। उसकी उंगलियाँ मेरी चूत को छूने लगीं, और मैं सिहर उठी। "आह्ह... ये क्या कर रहा है, पागल?" मैंने मस्ती भरे लहजे में कहा, मेरी साँसें तेज होने लगीं।

"मामी, तुम इस टी-शर्ट में इतनी सेक्सी लग रही हो, कंट्रोल नहीं हो रहा!" उसने कहा, और उसकी उंगलियाँ मेरी गीली चूत में अंदर-बाहर होने लगीं। "उफ्फ... कितनी गीली हो तुम!" उसने शरारती मुस्कान के साथ कहा। मैंने कराहते हुए जवाब दिया, "हाँ... तूने ही तो ये हाल किया है!" उसकी उंगलियाँ अब तेजी से मेरे क्लिट को रगड़ रही थीं, और मेरी सिसकारियाँ गाड़ी में गूँजने लगीं, "आह्ह... उह्ह... धीरे ना!"

मैंने उसकी ट्रैक पैंट की ओर देखा, जहाँ उसका लंड सख्त होकर तंबू बना रहा था। मैंने झट से उसका पैंट नीचे खींचा। उसका मोटा, गर्म लंड मेरे सामने था। मैंने उसे पहले हाथ में लिया, धीरे-धीरे सहलाया। "मामी, ये क्या करने लगीं?" उसने शरारत से पूछा। "वही जो तू कर रहा है!" मैंने हँसते हुए कहा और उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। मैंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया, मेरी जीभ उसके लंड के टॉप पर गोल-गोल घूम रही थी। "स्लर्प... स्लर्प... चप... चप..." की आवाजें गाड़ी में गूँज रही थीं। "आह्ह... मामी... उफ्फ... तुम तो कमाल हो!" उसने सिसकारते हुए कहा। मैंने और तेजी से चूसा, मेरा मुँह उसके लंड को पूरा निगल रहा था। "मामी... आह्ह... कितना मस्त चूसती हो!" उसकी सिसकारियाँ और तेज हो गईं। कुछ ही मिनटों में उसने मेरे मुँह में अपना गर्म, गाढ़ा रस छोड़ दिया। "उह्ह... ले लो मामी!" उसने कराहते हुए कहा। मैंने उसका सारा रस चाटकर साफ किया और कहा, "ये क्या, तेरा तो हो गया, अब मेरी आग का क्या?"

"अरे मामी, अभी तो बस ट्रेलर था, पूरी पिक्चर बाकी है!" उसने हँसते हुए कहा। उसने गाड़ी को एक सुनसान जंगल की ओर मोड़ा, जहाँ दूर-दूर तक कोई नहीं था। उसने गाड़ी रोकी और मुझे बाहर खींच लिया। "यहाँ? कोई देख लेगा!" मैंने डरते हुए कहा, लेकिन मेरी चूत में आग लगी थी, और मैं और चाह रही थी। उसने मेरी टी-शर्ट फाड़ दी, मेरे भारी स्तन हवा में लहराए। "उफ्फ... मामी, ये तो बम हैं!" उसने मेरे निप्पल्स को चूसते हुए कहा। फिर उसने मेरी स्कर्ट भी उतार दी। मैं पूरी तरह नंगी थी, जंगल की ठंडी हवा मेरे गीले शरीर को छू रही थी।

उसने मुझे गाड़ी के बोनट से टिकाया और घोड़ी बनने को कहा। मैंने झट से पोजीशन ले ली, मेरी चूत पूरी तरह खुली थी। उसने पीछे से मेरी चूत में अपना मोटा लंड डाला। "आह्ह... धीरे... उफ्फ!" मैं चिल्लाई। उसका लंड मेरे अंदर गहराई तक जा रहा था। "थप... थप... थप..." की आवाजें जंगल में गूँज रही थीं। "मामी, कितनी टाइट चूत है तुम्हारी!" उसने कहा और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। "हाँ... और जोर से... चोद मुझे, फाड़ दे!" मैं चीख रही थी। मेरी चूत गीली होकर चपचप कर रही थी, और हर धक्के के साथ "चप... चप... फच... फच..." की आवाजें आ रही थीं। "आह्ह... उह्ह... हाँ... और तेज!" मैं सिसकार रही थी। वो 20 मिनट तक मुझे उसी पोजीशन में चोदता रहा, उसका लंड मेरी चूत को रगड़ रहा था। "मामी, तुम्हारी चूत तो जन्नत है!" उसने कराहते हुए कहा।

फिर उसने मुझे घास पर लिटाया। घास मेरी पीठ को चुभ रही थी, लेकिन मैं इतनी मदहोश थी कि कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर चढ़कर फिर से अपना लंड मेरी चूत में डाला। "उफ्फ... मामी, तुम्हारी चूत कितनी गर्म है!" उसने कहा। "हाँ... और तेरा लंड कितना सख्त!" मैंने जवाब दिया। वो तेजी से धक्के मारने लगा, "थप... थप... फच... फच..." की आवाजें जंगल में गूँज रही थीं। मेरी सिसकारियाँ चीखों में बदल गईं, "आह्ह... हाँ... चोद... और जोर से... उह्ह!" 10 मिनट में मेरा शरीर अकड़ गया, मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। "आह्ह... मैं झड़ गई... उफ्फ!" मैं चिल्लाई। लेकिन वो रुका नहीं। "मामी, अभी मेरा बाकी है, और तुम्हें भी तो दूसरी बार झड़ना है!" उसने कहा और और तेज धक्के मारने लगा।

वो 25 मिनट तक मुझे जंगली जानवर की तरह चोदता रहा। मेरी चूत फिर से गर्म होने लगी, और मैं दूसरी बार झड़ने के करीब थी। "हाँ... और जोर से... फाड़ दे मेरी चूत... आह्ह!" मैं चीख रही थी। मेरी सिसकारियाँ और "फच... फच... थप... थप..." की आवाजें जंगल में गूँज रही थीं। आखिरकार, जब वो झड़ने वाला था, उसने अपना लंड बाहर निकाला। "मामी, मुँह खोलो!" उसने कहा। मैंने अपना मुँह खोला, और उसने अपने वीर्य की गर्म पिचकारी मेरे मुँह में छोड़ दी। "आह्ह... ले लो... पूरा!" उसने कराहते हुए कहा। वो इतना था कि मानो ज्वालामुखी फट गया हो। मैंने हर बूँद चाटकर साफ कर दी। "उफ्फ... कितना था!" मैंने हँसते हुए कहा।

वो हाँफते हुए बोला, "मामी, ये तो बस शुरुआत है। पूरी ट्रिप में तुम्हें ऐसे ही जमकर चोदूँगा।" मैंने शरारत से जवाब दिया, "देखते हैं, कितना दम है तुझमें, मेरे शेर!" हम दोनों हँसते हुए गाड़ी में वापस बैठ गए, मेरी चूत में अभी भी सिहरन थी, और मन में अगले पड़ाव का इंतज़ार शुरू हो गया।

पाठक प्रतिक्रिया • Reader Confessions

कामिनी के नाम आपकी पाती

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2 प्रतिक्रियाएं (2 Confessions)
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आकाश वर्मा सत्यापित पाठक
2 दिन पहले
स्क्रीन के पार की वो बेचैनी और आधी रात की फुसफुसाहट... डिजिटल ज़माने की सबसे गर्म दास्ताँ।
S
सीमा रस्तोगी सत्यापित पाठक
4 दिन पहले
कामिनी जी का हर अंदाज़ बेमिसाल है। 35 बॉडी काउंट्स और 40 की उम्र में भी जो आग है, वो अद्वितीय है।
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