सुबह की मदहोशी — तीनों एक बेड पर
CHAPTER 16 Jaipur Nights

सुबह की मदहोशी — तीनों एक बेड पर

Dawn on the Shared Bed: Pure Abandon
"रात के चार बज चुके थे... हम तीनों बिल्कुल बेनकाब, एक ही बिस्तर पर सोए हुए थे।"
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रात के चार बज चुके थे। हम तीनों बिल्कुल नंगे, एक ही डबल बेड पर लेटे थे। मैं बीच में।

बायीं तरफ़ दीपक, दायीं तरफ़ रॉकी।

दीपक ने मेरी बायीं चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था, रॉकी ने दायीं चूची को हाथ से मसलते हुए निप्पल चुटकी काट रहा था।

मेरी दोनों टाँगें फैली हुई थीं, चूत से अभी भी वीर्य टपक रहा था। दोनों का लौड़ा मेरी जाँघों से चिपका हुआ था।

धीरे-धीरे सब सो गए।

सुबह ठीक सात बजे मेरी नींद खुली।

सूरज की पहली किरण खिड़की से आ रही थी। मैंने आँखें मलीं और देखा…

वाह रे मेरे दोनों छोरे!

दोनों के लौड़े तंबू बनाकर सीधे खड़े थे।

दीपक का 6 इंच वाला प्यारा सा, रॉकी का 9 इंच का राक्षस।

दोनों सुपारे चमक रहे थे, नसें फूली हुई थीं।

मैंने पहले दीपक का पकड़ा। उसका सुपारा पहले से ही चिपचिपा था।

फिर रॉकी का। मोटा, गरम, नसें फूली हुईं।

मैंने दोनों को एक साथ ज़ोर-ज़ोर से हिलाना शुरू किया।

चप-चप… चप-चप… चप-चप… मेरे हाथ की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी।

दीपक ने आँखें खोलीं और कराहा,

“उफ्फ्फ़… मामी… सुबह-सुबह इतना जोश? मेरा तो अभी से झड़ने वाला है…”

रॉकी ने मेरे बाल पकड़े और अपना लौड़ा मेरे गाल पर मारते हुए बोला,

“अरे दीपक, चुप कर… ये रंडी मामी सुबह का नाश्ता तैयार कर रही है… ले मामी, पहले मुँह में ले दोनों का…”

मैं घुटनों पर बैठ गई।

दीपक का पूरा लौड़ा मुँह में। गप्प्प… गप्प्प… गप्प्प…

रॉकी का आधा ही घुस रहा था। मैंने ज़ोर से खींचा।

गलक… गलक… गलक… मेरे गले से आवाज़ आ रही थी।

लार की मोटी-मोटी धारें मेरे होंठों से टपक रही थीं।

दीपक ने मेरे सिर को पकड़कर बोला,

“मामी… ज़ोर से चूस… जैसे मालदीव में चूसती थी… आह्ह… हाँ… वैसे ही…”

रॉकी ने मेरी गांड पर ज़ोरदार थप्पड़ मारा,

“थप्प्प्प्प… ले रंडी… मेरा भी पूरा निगल… आज सुबह तेरा गला फाड़ दूँगा…”

मैंने दोनों लौड़े एक साथ मुँह में लेने की कोशिश की।

दोनों सुपारे मेरे होंठों से टकरा रहे थे।

“गप्प्प… गप्प्प… गलक… गलक…”

फिर दीपक ने मुझे बेड पर लिटाया, मेरी दोनों टाँगें कंधों पर।

“मामी… अब तेरी चूत की बारी… सुबह का पहला धक्का…”

उसने अपना लौड़ा चूत के मुँह पर रगड़ा।

चिपचिप… चिपचिप…

फिर एक झटका।

“थप्प्प्प्प…!”

“आआआआह्ह्ह्ह्ह… दीपक… मादरचोद… सुबह-सुबह ही इतना ज़ोर से?”

“ले मामी… ले… ले… ले…”

हर धक्के के साथ थप-थप-थप-थप… बेड हिल रहा था।

रॉकी मेरे मुँह में लौड़ा ठूँस रहा था।

“गप्प्प… गलक… गप्प्प…”

उसने मेरे बाल पकड़े और बोला,

“मामी… बोल… सुबह का लौड़ा कैसा लग रहा है?”

मैंने हाँफते हुए कहा,

“बहुत… बहुत गरम… आह्ह… दीपक… ज़ोर से… बच्चेदानी तक पहुँचा दे… थप-थप-थप…”

फिर रॉकी ने जगह बदली।

उसने मुझे दीवार से सटाया, पीछे से।

“ले मामी… अब असली मोटा लौड़ा…”

उसने एक ही झटके में 9 इंच पूरा अंदर ठूँस दिया।

“थप्प्प्प्प्प्प्प…!”

“आआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह… रॉकी… बाप रे… फट गई चूत… मादरचोद… धीरे…”

“चुप रंडी… सुबह की चुदाई ऐसी ही होती है…”

थप-थप-थप-थप-थप-थप… मेरी गांड उसके जाँघों से टकरा रही थी।

दीपक सामने आया, मुँह में लौड़ा।

“गप्प्प… गलक… गप्प्प…”

मैं दीवार से सटी, आगे-पीछे से पेली जा रही थी।

रॉकी ने मेरी गांड पर थप्पड़ों की बौछार कर दी।

थप्प्प्प… थप्प्प्प… थप्प्प्प…

“ले… ले… ले रंडी मामी… सुबह का थप्पड़…”

फिर डबल पेनिट्रेशन।

दीपक नीचे लेटा, मैं उसके ऊपर।

उसका लौड़ा चूत में।

रॉकी पीछे से गांड में।

“आआआआह्ह्ह्ह… दोनों… दोनों मिलकर मार डालोगे… आह… छूट रही हूँ… आआआआआआ…”

चरमर-चरमर… चरमर-चरमर… चूत और गांड दोनों से आवाज़ें।

मैंने इतना पानी छोड़ा कि बेडशीट पर झील बन गई।

अंत में दोनों ने मुझे घुटनों पर बिठाया।

दीपक बोला, “मुँह खोल मामी… सुबह का दूध पी ले…”

रॉकी बोला, “हाँ… दोनों का एक साथ… ले… ले… ले…”

दोनों ने एक साथ मेरे मुँह, चेहरे, चूचियों पर झड़ दिया।

फचाक… फचाक… फचाक… गाढ़ी धारें मेरे मुँह में, गले में, चूचियों पर।

मैंने सब निगल लिया और जीभ से बचा हुआ चाटते हुए बोली,

“वाह बेटो… सुबह का नाश्ता तो बहुत स्वादिष्ट था… अब शाम का इंतज़ार है…”

दोनों हँसते हुए मेरे दोनों तरफ़ लेट गए।

दीपक ने मेरी चूची चूसते हुए कहा,

“मामी… आज से रोज़ सुबह 7 बजे तेरा हाथ हमारे लौड़े पर बजेगा…”

रॉकी ने मेरी गांड में उँगली डालते हुए बोला,

“और रात को 11 बजे भी… और दोपहर में भी…”

मैंने दोनों को किस किया और बोली,

“हाँ मेरे राजा… तुम्हारी मामी अब तुम्हारी 24×7 की रंडी है… जब मन करे, चूत में, गांड में, मुँह में… जहाँ मन करे डाल लेना…” 😈

पाठक प्रतिक्रिया • Reader Confessions

कामिनी के नाम आपकी पाती

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2 प्रतिक्रियाएं (2 Confessions)
M
मोहित रावत सत्यापित पाठक
1 दिन पहले
आधी रात की सिगरेट और सामने वाली बालकनी का वो इशारा... बहुत ही हॉट और रोमांचक।
J
जितेंद्र सक्सेना सत्यापित पाठक
3 दिन पहले
सिर्फ इशारों में पूरी रात का खेल... ये अध्याय बहुत ही अनोखा था कामिनी जी।
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