जयपुर का फ्लैट — दीपक और रॉकी के संग
CHAPTER 15 Jaipur Nights

जयपुर का फ्लैट — दीपक और रॉकी के संग

Jaipur Duet: Unveiling in the Penthouse
"जयपुर पहुँचते ही दीपक मुझे अपने फ्लैट पर ले गया... रात गहराते ही हर सीमा मिट गई।"
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जयपुर पहुँचते ही दीपक ने मुझे अपनी फ्लैट पर ले गया। उसका दोस्त रॉकी (उसी के साथ PG शेयर करता है) भी घर पर था। मैंने लाल साड़ी ही पहनी रखी थी, वही वाली जिसमें ट्रेन में चुदकर आई थी। चूत अभी भी हल्की गीली और ढीली थी।

रात के 11 बज रहे थे। रॉकी अपने कमरे में चला गया था। दीपक ने मुझे बेडरूम में खींचा और दरवाज़ा लॉक करना भी भूल गया। उसने मुझे दीवार से सटा दिया, साड़ी ऊपर की और अपना 6 इंच का लौड़ा मेरी चूत पर रगड़ने लगा।

“मामी… दो दिन से तरस रहा था… आज पूरी रात नहीं छोडूंगा,” वो हाँफते हुए बोला।

“ले बेटा… अपनी मामी को पेल… आज तेरी बीवी बनकर चुदूँगी,” मैंने उसकी पैंट खींचते हुए कहा।

दीपक ने मुझे बेड पर पटका, टाँगें फैलाईं और एक ही झटके में पूरा लौड़ा अंदर ठूँस दिया।

“आह्ह… दीपक… धीरे…

मामी… दो दिन से तरस रहा था… आज तेरी चूत फाड़ दूँगा,” वो दाँत पीसते हुए बोला।

“ले बेटा… अपनी मामी-बीवी को पेल… आज पूरी रात तेरी रंडी हूँ,” मैंने उसकी गांड दबाते हुए कहा।

तभी दरवाज़ा खुला। रॉकी अंदर आया, सिर्फ़ बॉक्सर में। उसका 9 इंच का मोटा लौड़ा पहले से ही बाहर झाँक रहा था।

“अबे दीपक मादरचोद… ये तेरी मौसी है ना? तू अपनी मामी को चोद रहा है?”

दीपक रुका नहीं, उल्टे और ज़ोर से पेलने लगा।

“हाँ साले… मेरी मामी भी है, मेरी बीवी भी है… देख कितनी रसीली चूत है… आ जा, आज दोनों मिलकर इसकी बैंड बजाते हैं।”

रॉकी ने बॉक्सर उतारा और बेड पर चढ़ गया। उसका लौड़ा मेरे मुँह के ठीक सामने था।

“मामी… मुझे भी तो चखाओ ना… मैंने कभी किसी की मामी को नहीं चोदा,” वो अपना सुपारा मेरे होंठों पर रगड़ते हुए बोला।

मैंने जीभ निकालकर उसका सुपारा चाटा और बोली, “ले बेटा… आज तेरी मामी दोनों लौड़ों की गुलाम है…”

मैंने रॉकी का लौड़ा मुँह में लिया। दीपक नीचे से चूत पेल रहा था।

गप-गप-गप… थप-थप-थप… कमरे में सिर्फ़ ये दो आवाज़ें।

दीपक ने मेरी चूची मसलते हुए पूछा, “मामी… सच बता… ट्रेन में भी किसी ने चोदा था ना? तेरी चूत अभी भी चिकनी-चिकनी लग रही है।”

मैंने रॉकी का लौड़ा मुँह से निकालकर हाँफते हुए कहा, “हाँ बेटा… 8 इंच वाला था… तुझसे ज़्यादा मोटा… पूरा रात पेलता रहा… आह्ह… रॉकी ज़ोर से… गले तक ठूँस दे…”

रॉकी ने मेरे बाल पकड़े और पूरा लौड़ा गले में उतार दिया। मेरी आँखों में पानी आ गया।

“ले रंडी मामी… आज तुझे दो-दो लौड़े खिलाते हैं…”

फिर दीपक ने मुझे उल्टा किया। कुत्ते स्टाइल में।

“ले… अब तेरी गांड भी देखते हैं,” दीपक ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारा।

रॉकी मेरे मुँह में, दीपक पीछे से।

“आह्ह… दीपक… धीरे… गांड नहीं… सिर्फ़ चूत…”

“चुप रंडी… आज दोनों छेद खोलेंगे,” रॉकी ने कहा और अपना लौड़ा मेरे गले में फिर ठूँसा।

दीपक ने चूत में उँगलियाँ डालीं, फिर धीरे से एक उँगली गांड में।

“आआआह्ह… मादरचोद… दोनों मिलकर मार डालोगे क्या?”

“हाँ मामी… आज तेरी दोनों छेदों की सील तोड़ेंगे,” दीपक हँसा।

फिर रॉकी ने जगह बदली। उसका 9 इंच का मोटा लौड़ा जब मेरी चूत में घुसा तो मैं चीख पड़ी।

“आआआह्ह्ह… रॉकी… बाप रे… फट गई… दीपक… देख तेरा दोस्त तेरी बीवी की चूत फाड़ रहा है…”

“ले साली… अब रो मत… अभी तो पूरा खेल बाकी है,” रॉकी ने मेरी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से पेलना शुरू किया।

दीपक मेरे मुँह में अपना लौड़ा ठूँस रहा था।

“मामी… बोल… कौन बेहतर चोदता है? मैं या रॉकी?”

मैंने लौड़ा मुँह से निकालकर हाँफते हुए कहा, “दोनों… दोनों बेहतरीन… बस पेलते रहो… आह्ह… रॉकी… बच्चेदानी पर लग रहा है… और ज़ोर से…”

फिर दोनों ने मुझे सैंडविच बना दिया।

दीपक नीचे लेटा, मैं उसके ऊपर। उसका लौड़ा चूत में। रॉकी पीछे से खड़ा होकर गांड में उँगलियाँ डाल रहा था।

“मामी… तैयार हो ना? आज डबल पेनिट्रेशन…”

मैंने डरते हुए कहा, “धीरे से बेटा… पहली बार है…”

रॉकी ने थूक लगाया और धीरे-धीरे अपना मोटा लौड़ा मेरी गांड में उतारने लगा।

“आआआआह्ह्ह… मादरचोद… फट गई… रुक… रुक…”

पर वो नहीं रुका। आधा घुसा ही था कि मैंने तकिया मुँह में दबाकर चीख निकाली।

दोनों लौड़े एक साथ अंदर। दोनों एक साथ हिलने लगे।

“ले रंडी मामी… आज तेरी दोनों छेद भर दिए…”

मैं पागल हो गई। मेरी चूत और गांड दोनों में आग लगी थी।

“आह… आह… बस… दोनों मिलकर मार डालोगे… छूट रही हूँ… आआआह्ह्ह…”

मैंने इतना पानी छोड़ा कि दीपक की जाँघें तक भीग गईं।

फिर दोनों ने मुझे घुटनों पर बिठाया।

“मुँह खोल मामी…”

दोनों ने एक साथ मेरे मुँह, चेहरे, चूचियों पर झड़ दिया। गाढ़ा, गरम वीर्य मेरे होंठ, गाल, मंगलसूत्र, चूचियाँ… सब पर।

मैंने जीभ निकालकर चाटा और दोनों के लौड़े चूस-चूसकर साफ किए।

“अब से मामी… रोज़ आएँगी ना?” रॉकी ने मेरी गांड दबाते हुए पूछा।

“हाँ बेटा… जब मन करे, दोनों मिलकर अपनी मामी को चोद लेना… मैं तुम्हारी गुलाम रंडी हूँ…”

रात अभी 3 बजे थे। दोनों फिर खड़े हो गए।

मैं बेड पर लेटी, टाँगें फैलाकर मुस्कुराई…

“आओ बेटो… अभी तो पूरी रात बाकी है…” 😈

पाठक प्रतिक्रिया • Reader Confessions

कामिनी के नाम आपकी पाती

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2 प्रतिक्रियाएं (2 Confessions)
R
राघव बजाज सत्यापित पाठक
2 दिन पहले
शराब की चुस्की और कल्प के दोस्त की आँखों में झांकना... गुनाह और जूनून की दास्तान।
S
स्नेहा कुलकर्णी सत्यापित पाठक
5 दिन पहले
कामिनी जी, आपकी हर कहानी दिल को बेपरवाह और बदन को बेचैन बना देती है।
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