नया साल की रात थी।
31 दिसंबर, रात के ग्यारह बज चुके थे। बाहर पटाखे फूट रहे थे, लोग “हैप्पी न्यू ईयर” चिल्ला रहे थे, लेकिन मेरे घर में सिर्फ़ मेरी चूत की आग और मेरी तड़प थी।
भांजा फिर कहीं बाहर गया था। मैंने जान-बूझकर काले रंग की ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी – इतनी पतली कि मेरे गुलाबी निप्पल और चूत की दरार साफ़ दिख रही थी। अंदर कुछ नहीं। बस वो काली नाइटी और मेरी भूख।
घंटी बजी।
मैंने सोचा, “गुप्ता जी फिर आए होंगे…”
दरवाज़ा खोला तो सामने दो सांता खड़े थे!
एक तो गुप्ता जी – लाल कोट, सफ़ेद दाढ़ी।
दूसरे शर्मा जी – हमारे मोहल्ले के ही, 58 साल के, हमेशा मेरी गांड पर नज़र रखते थे।
दोनों के हाथ में शैम्पेन की बोतल और बड़ा सा थैला।
गुप्ता जी मुस्कुराए, “हैप्पी न्यू ईयर रंडी… इस बार दो सांता आए हैं… तेरी दोनों छेद भरने!”
शर्मा जी ने मेरी नाइटी के अंदर झांकते हुए कहा, “का कामिनी… आज नया साल तेरी चूत और गांड में मनाएँगे… तैयार है ना?”
मैंने शरमाते हुए दरवाज़ा बंद किया और बोली, “आ जाओ दोनों मालिक… आज रात मैं तुम्हारी रंडी हूँ… जो मन करे करो!”
दोनों अंदर आ गए। गुप्ता जी ने मुझे दीवार से सटा दिया और नाइटी के ऊपर से बूब्स मसलने लगे।
शर्मा जी पीछे से आए, गांड पर हाथ फेरते हुए बोले, “का माल है री… ये गांड तो आज फाड़ देंगे हम दोनों मिलकर…”
फिर दोनों ने मास्क उतारे।
मैं हँस पड़ी, “गुप्ता जी… शर्मा जी… आप दोनों?? वाह… आज तो लॉटरी लग गई!”
गुप्ता जी बोले, “क्रिसमस पर तुझे अकेले चोदा था… आज नया साल है, शर्मा को भी बुला लिया… आज डबल पेनिट्रेशन का मजा लेंगे रंडी!”
दोनों ने मुझे बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया।
मैंने नाइटी ऊपर कर दी – “देखो… कितना पानी छोड़ रही हूँ… दोनों के लंड एक साथ देख कर…”
गुप्ता जी ने अपना 8 इंच का मोटा लंड निकाला।
शर्मा जी ने अपना 7 इंच का, लेकिन बहुत मोटा, गोल-गोल सुपारा वाला लंड बाहर निकाला।
दोनों लंड मेरे मुँह के सामने लटक रहे थे।
मैं पागल हो गई – “दो… दो लंड… आह्ह्ह… आज मर जाऊँगी मैं…”
गुप्ता जी ने मेरा सिर पकड़ा और अपना लंड मुँह में ठूँस दिया।
शर्मा जी नीचे झुक कर मेरी चूत चाटने लगे।
मैं – “उम्म्म्म्म्म… गुप्ता जी… गला चोदो… शर्मा जी… जीभ अंदर… हाँ… दोनों एक साथ… आह्ह्ह्ह्ह… मैं तेरी रंडी हूँ… दोनों की साझा रंडी…”
शर्मा जी चाटते-चाटते बोले, “का रसीली चूत है री… गुप्ता ने बताया था… आज सच में स्वाद चख लिया… पानी तो झरना बनके बह रहा है…”
10 मिनट तक गुप्ता जी मुँह चोदते रहे, शर्मा जी चूत चाटते रहे। मैं दो बार झड़ गई।
मैं बिस्तर के बीचों-बीच घोड़ी बनी हुई थी।
घुटने और कोहनियाँ बिस्तर पर टिके, गांड हवा में ऊँची, चूत और गांड की दरारें पूरी तरह खुली हुईं।
दोनों तरफ़ दो भूखे शेर खड़े थे – गुप्ता जी मेरे पीछे, शर्मा जी मेरे आगे।
गुप्ता जी ने पहले अपना 8 इंच का मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ा।
“ले रंडी… पहले तेरी चूत को फिर से खोलता हूँ…”
और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर तक पेल दिया।
मैं चीखी, “आआआह्ह्ह्ह्ह… गुप्ता जी… पूरा बच्चेदानी में घुस गया… आह्ह्ह्ह्ह…”
शर्मा जी ने अपना 7 इंच का गोल-मोटा, सुपारा जैसे बड़ा सा मशरूम वाला लंड मेरी गांड पर टिकाया।
मुंह से थूक निकाल कर गांड पर मला और बोले, “अब तेरी गांड की सील तोड़ता हूँ… सांस रोक रंडी…”
मैंने सांस रोकी।
शर्मा जी ने कमर पकड़ी और धीरे-धीरे सुपारा अंदर धकेला।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह… मर गयीीी… बहुत मोटा है सुपारा… धीरे शर्मा जी… फट जाएगी गांड…”
शर्मा जी रुके नहीं, एक और जोर का धक्का… पूरा सुपारा अंदर चला गया।
फिर आधा लंड… फिर पूरा।
अब मैं बीच में फँसी थी –
आगे गुप्ता जी का 8 इंच चूत में,
पीछे शर्मा जी का मोटा लंड गांड में।
दोनों लंड सिर्फ़ एक पतली सी दीवार के फ़ासले पर थे। मुझे लग रहा था दोनों आपस में टकरा रहे हैं।
गुप्ता जी ने पहले धक्का मारा – “ले… ले… अब शुरू होता है असली नया साल…”
शर्मा जी ने भी कमर पीछे खींची और ज़ोर से पेला – “ले साली… गांड मार… पूरी गांड मार…”
दोनों ने एक साथ रिदम पकड़ लिया।
जब गुप्ता जी अंदर धकेलते, शर्मा जी बाहर खींचते…
फिर शर्मा जी अंदर, गुप्ता जी बाहर।
जैसे कोई देखा-देखी का खेल चल रहा हो।
हर धक्के में मुझे ऐसा लगता जैसे मेरे अंदर कोई आरी चल रही हो।
मैं चीख-चीख कर बोली,
“आह्ह्ह्ह… दोनों एक साथ… मर जाऊँगी… आह्ह्ह्ह्ह… पर मत रुकना… और जोर से… दोनों मिल कर फाड़ दो मुझे…
गुप्ता जी… आपका लंड बच्चेदानी से टकरा रहा है…
शर्मा जी… आपका सुपारा गांड के अंदर फूल रहा है… आह्ह्ह्ह्ह… मैं तुम्हारी साझा रंडी हूँ… चोदो… चोदो…!!!”
गुप्ता जी हाँफते हुए बोले,
“देख शर्मा… कितनी टाइट चूत है… तेरे लंड का दबाव भी महसूस हो रहा है… जैसे दोनों मिल कर इसकी चूत-गांड को मसल रहे हैं…”
शर्मा जी हँसे, “हाँ यार… इसकी गांड तो जैसे आग है… रोज़ चुदवाती है फिर भी इतनी टाइट… ले रंडी… अब एक साथ धक्का मारते हैं…”
और फिर दोनों ने एक साथ धक्का मारा।
दोनों लंड एकदम से पूरी गहराई तक घुस गए।
मैंने जो चीख मारी, पूरा मोहल्ला सुन लेता अगर पटाखे न फूट रहे होते।
“आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… मादरचोद… दोनों एक साथ… बस… मैं झड़ रही हूँ… ले… ले… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!”
मेरी चूत और गांड से एक साथ फव्वारा छूटा।
चूत का पानी गुप्ता जी के लंड पर, गांड से चिपचिपा माल शर्मा जी के लंड पर।
दोनों नहीं रुके। और तेज़ हो गए।
फच-फच-फच… फट-फट-फट…
मेरी गांड और चूत से झाग बनने लगा – सफ़ेद, गाढ़ा।
मैं बिस्तर की चादर पकड़ कर चिल्लाती रही,
“और तेज़… दोनों मिल कर ठोको… मुझे बींच में पीस दो… आह्ह्ह्ह… फिर आ रहा है… ले… ले… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!”
दूसरी बार झड़ी।
फिर तीसरी बार… चौथी बार…
मेरी टाँगें काँपने लगीं, आँखों के आगे अंधेरा छा गया।
शर्मा जी बोले, “यार गुप्ता… अब मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ डालूँ?”
गुप्ता जी – “इसी की गांड में… पूरा भर दे… मैं चूत में छोड़ूँगा…”
पर मैं चिल्लाई, “नहीं… बाहर… दोनों बाहर निकालो… मुझे अपने माल की बौछार चाहिए… नया साल की पहली पिचकारी…”
दोनों ने लंड निकाले। मुझे घुटनों पर बिठाया।
दोनों मेरे मुँह के सामने लंड हिलाने लगे।
गुप्ता जी पहले झड़े – 10 ज़ोर की फुहारें… मेरे मुँह, नाक, बूब्स पर।
शर्मा जी तुरंत बाद – उनका माल और भी गाढ़ा… मेरे बालों में, गालों पर, होंठों पर।
दोनों का वीर्य मिलकर मेरे चेहरे पर बह रहा था।
मैंने जीभ निकाल कर चाटा, उंगली से उठा-उठा कर मुँह में डाला और बोली,
“वाह… दोनों का माल एक साथ… गुप्ता जी का नमकीन… शर्मा जी का मीठा… उम्म्म्म्म… नया साल तो बन गया…
अब हर त्योहार पर ऐसे ही दोहरी मार चाहिए…
या अगली बार तीन लंड ले आओ… मेरी चूत-गांड-मुँह… सब तैयार हैं…”
दोनों हँसे और मेरी गांड पर एक-एक चपत मारकर बोले,
“तेरी फरमाइश पूरी करेंगे रंडी… होली पर तीन सांता लाएँगे… रंग के साथ लंड भी डालेंगे…”
मैं उनके लंड चूमती रही… और सोचती रही –
अब होली तक कितने दिन बाकी हैं? 😈
कामिनी के नाम आपकी पाती
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