सुहागरात की गर्म सुबह — इन्फिनिटी पूल की रवानगी
CHAPTER 11 Honeymoon Chronicles

सुहागरात की गर्म सुबह — इन्फिनिटी पूल की रवानगी

Honeymoon Dawn: Infinity Pool & Warm Waters
"प्राइवेट इन्फिनिटी पूल का पानी और हमारी दहकती हुई त्वचा एक दूजे में घुल रहे थे..."
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कामिनी को महसूस करने के लिए पढ़ते समय साउंड ऑन रखें • अंतरंग धुन

सुहागरात की चुदाई के बाद हम दोनों थककर बेड पर सो गए थे, लेकिन सुबह की धूप मेरे नंगे जिस्म पर पड़ रही है, और मैं धीरे से आँखें खोलती हूँ। दीपक मेरे बगल में लेटा है, उसका जवान, मसल्स वाला जिस्म मेरे साथ चिपका हुआ है। रात की यादें—उसके गहरे थ्रस्ट्स, मेरे मल्टीपल ऑर्गेज़म, और हमारी सिसकारियाँ जो लहरों के साथ मिल गई थीं—मेरी चूत को फिर से गीला कर रही हैं। मैं बेड से उठती हूँ, बाथरूम में जाकर फ्रेश होती हूँ, और एक गोल्डन बिकिनी पहन लेती हूँ। ये बिकिनी इतनी टाइट है कि मेरे निपल्स और चूत की आउटलाइन हल्की दिख रही है। मैं शीशे में खुद को देखकर मुस्कुराती हूँ, “आज सुबह दीपक को फिर से पागल कर दूँगी।”

मैं कोटेज के प्राइवेट इन्फिनिटी पूल की ओर जाती हूँ, जहाँ दीपक पहले से तैर रहा है। सूरज की रोशनी में पूल का पानी नीला चमक रहा है, और समंदर का व्यू इसे जादुई बना रहा है। मैं पूल के किनारे खड़ी होती हूँ, मेरी बिकिनी धूप में चमक रही है। “दीपक, देख तेरी रानी कैसे लग रही है,” मैं कहती हूँ, और अपने कूल्हे हिलाकर उसे टीज़ करती हूँ। वो तैरकर मेरे पास आता है, उसकी आँखें मेरी क्लीवेज पर अटक जाती हैं। “कामिनी, ये गोल्डन बिकिनी... तू तो सुबह-सुबह आग लगा रही है! मैं तुझे अभी पूल में खींच लूँ?” वो हँसते हुए कहता है, और मेरा हाथ पकड़कर मुझे पानी में खींच लेता है।

गर्म पानी मेरे जिस्म को लपेट लेता है, और मैं दीपक की बाहों में चली जाती हूँ। “दीपक, रात को सुहागरात मनाई, लेकिन सुबह का मज़ा बाकी है... तू क्या चाहता है?” मैं व्हिस्पर करती हूँ, मेरे होंठ उसके कानों को छू रहे हैं। वो मेरी कमर पकड़ता है, “कामिनी, मैं तुझे इस पूल में चोदना चाहता हूँ... पानी में तेरे जिस्म को देखकर मेरा लंड तन गया है।” वो मुझे पूल की दीवार से सटाता है और मेरे होंठों पर एक गहरा, गीला किस करता है। हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही हैं, पानी की छोटी-छोटी लहरें हमारे जिस्मों से टकरा रही हैं। “दीपक, तू कितना रोमांटिक है... चूम मुझे, मेरे पूरे जिस्म को प्यार दे,” मैं सिसकारी लेती हूँ।

वो मेरी बिकिनी का टॉप ढीला करता है, और मेरे भारी स्तन पानी में तैरने लगते हैं, निपल्स सख्त और चमकदार। “कामिनी, तेरे ये चूचे कितने गजब हैं... पानी में और रसीले लग रहे हैं,” वो कहता है, और एक निपल को मुँह में ले लेता है। वो धीरे-धीरे चूसता है, जीभ से निपल के चारों ओर घेरे बनाता है, फिर हल्के से काटता है, जिससे मेरे पूरे जिस्म में करंट दौड़ जाता है। “आह्ह... दीपक, ऐसे चूस... तेरे होंठ कितने गर्म हैं... दूसरे को भी प्यार दे,” मैं कराहती हूँ, मेरे हाथ उसके गीले कंधों पर कस रहे हैं। वो दूसरे निपल पर जाता है, “तेरे निपल्स का स्वाद जैसे शहद और समंदर का मिक्स... मैं इन्हें चूसता रहूँ,” वो गुर्राता है, और साथ में अपना हाथ मेरी बिकिनी के बॉटम में सरकाता है, मेरी क्लिट को हल्के से रगड़ता है। पानी मेरी चूत को और सेंसिटिव बना रहा है।

“दीपक, मेरी बिकिनी उतार... मुझे पूल में नंगी कर,” मैं कहती हूँ, मेरी आवाज़ में जुनून भरा है। वो मेरी बिकिनी का बॉटम उतार देता है, और अब मैं पूल में पूरी नंगी हूँ, पानी मेरे जिस्म को सहला रहा है। “कामिनी, तेरी चूत पानी में कितनी गुलाबी और गीली लग रही है... मैं इसे चाटना चाहता हूँ,” वो कहता है, और मुझे पूल के किनारे पर बिठाता है, मेरे पैर पानी में लटक रहे हैं। वो मेरे पैर फैलाता है और मेरी चूत पर जीभ लगाता है, धीरे-धीरे क्लिट को चाटता है, फिर होंठों को अलग करके जीभ अंदर डालता है। “आह्ह... दीपक, तेरी जीभ कितनी जादुई है... और अंदर डाल, चाट मुझे जैसे कोई भूखा शेर!” मैं चीखती हूँ, मेरे हाथ पूल के किनारे पर कस जाते हैं। वो मेरी चूत में दो उंगलियाँ डालता है, उन्हें घुमाता है, मेरी जी-स्पॉट को टच करता है। “तेरी चूत का स्वाद कितना मीठा है, कामिनी... पानी के साथ और टेस्टी लग रहा है,” वो कहता है, और वैक्यूम की तरह चूसता है।

मैं उसके बाल पकड़कर कहती हूँ, “दीपक, अब तेरा लंड दे... मैं इसे चूसना चाहती हूँ... तेरा स्वाद लेना है!” वो पूल से बाहर आता है, अपनी स्विम ट्रंक उतारता है, और उसका 7 इंच का मोटा, तना हुआ लंड मेरे मुँह के पास लाता है, टिप पर प्री-कम चमक रहा है। “ले, कामिनी... चूस मेरा लंड... जैसे तू मेरी पर्सनल स्लट है,” वो कहता है, और मैं उसका लंड मुँह में ले लेती हूँ। मैं धीरे से टिप चाटती हूँ, नमकीन प्री-कम निगलती हूँ, फिर पूरा लंड अंदर लेती हूँ, मेरे होंठ शाफ्ट पर टाइटली स्लाइड करते हैं। “आह्ह... कामिनी, तू कितनी एक्सपर्ट है... और गहरा ले, गले तक!” वो कराहता है, और मैं डीप थ्रोट करती हूँ, उसकी गेंदों को हल्के से सहलाती हूँ। पानी की छोटी लहरें मेरे पैरों को छू रही हैं, जो उत्तेजना को और बढ़ा रहा है।

“दीपक, अब चोद मुझे... पूल में, धीरे से शुरू कर, रोमांटिक तरीके से,” मैं कहती हूँ। वो मुझे पूल में वापस खींचता है, मुझे दीवार से सटाता है, और मिशनरी पोजिशन में मेरा एक पैर उठाकर अपने कंधे पर रखता है। “कामिनी, मैं तुझे पानी में प्यार से चोदूँगा... देख, तेरी चूत कितनी गीली है,” वो कहता है, और अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रगड़ता है, धीरे से इंच दर इंच अंदर डालता है। “आह्ह... दीपक, तेरा लंड मुझे भर रहा है... इतना मोटा, इतना गहरा... हाँ, ऐसे ही,” मैं सिसकारी लेती हूँ। वो धीरे-धीरे थ्रस्ट करता है, हर धक्के में लंड पूरा बाहर निकालता है, फिर गहरा डालता है, पानी के स्लिपरी फील से और स्मूद। “कामिनी, तेरी चूत कितनी टाइट और गर्म है... पानी में और मज़ा आ रहा है,” वो कहता है, और मेरे होंठ चूसता है।

मैं उसके कूल्हों को पकड़ती हूँ, “दीपक, अब थोड़ा तेज़ कर... लेकिन प्यार से... मैं हर थ्रस्ट महसूस करना चाहती हूँ,” मैं कहती हूँ। वो गति बढ़ाता है, हर थ्रस्ट गहरा, उसकी गेंदें मेरी गांड से टकरा रही हैं, स्लैप की आवाज़ पानी की लहरों के साथ मिल रही है। “कामिनी, तेरी सिसकारियाँ मुझे पागल कर रही हैं... चीख ना, मेरी दुल्हन,” वो कहता है। मैं चीखती हूँ, “आह्ह... दीपक, चोद मुझे... तेरे लंड की नसें मेरी चूत को रगड़ रही हैं... और ज़ोर से!” वो मेरे स्तनों को दबाता है, निपल्स को चुटकी में लेता है, और तेज़ थ्रस्ट करता है। पानी हमारे जिस्मों पर स्प्लैश कर रहा है, जो चुदाई को और इंटेंस बना रहा है।

अब पोजिशन चेंज। “दीपक, अब मैं तुझे राइड करूँगी,” मैं कहती हूँ, और उसे पूल की सीढ़ियों पर बिठाकर उसकी गोद में आ जाती हूँ। मैं उसका लंड अपनी चूत में लेती हूँ, धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होती हूँ, काउगर्ल पोजिशन में। “देख, दीपक... तेरे लंड पर मैं कैसे उछल रही हूँ... मेरे चूचे तेरे लिए हिल रहे हैं,” मैं कहती हूँ, मेरे स्तन उछल रहे हैं। वो उन्हें पकड़ता है, “हाँ, कामिनी... राइड कर... तेरी गांड पानी में कितनी सेक्सी लग रही है... और तेज़!” वो कहता है, और नीचे से थ्रस्ट करता है, मेरे कूल्हों को पकड़कर। मैं गति बढ़ाती हूँ, हर उछाल में उसका लंड मेरी जी-स्पॉट को हिट करता है। “दीपक, मैं झड़ने वाली हूँ... तेरे लंड पर कस रही हूँ,” मैं चीखती हूँ। वो मेरी क्लिट को रगड़ता है, “झड़ जा, कामिनी... मैं महसूस करना चाहता हूँ तेरी चूत का कंपन!” और मैं पहली बार झड़ जाती हूँ, मेरी चूत से जूस निकलता है, जो पानी में घुल जाता है।

वो रुकता नहीं। “अब डॉगी में, कामिनी... पूल के किनारे,” वो कहता है। मैं पूल के किनारे पर घुटनों और हाथों पर झुकती हूँ, मेरी गांड ऊपर, पानी मेरी जांघों को छू रहा है। वो पीछे से लंड डालता है, धीरे से शुरू करता है। “उफ्फ... दीपक, पीछे से तेरा लंड कितना गहरा जा रहा है... मेरी गर्भाशय को छू रहा है!” मैं कराहती हूँ। वो मेरे कूल्हों को पकड़ता है, “कामिनी, तेरी गांड कितनी रसीली है... हर थ्रस्ट में टकरा रही है... मैं तुझे जंगली की तरह चोदूँगा,” वो गुर्राता है, और गति बढ़ाता है। हर थ्रस्त तेज़, गहरा, उसकी गेंदें मेरी गांड से स्लैप कर रही हैं। “दीपक, थप्पड़ मार... मेरी गांड को लाल कर दे!” मैं चीखती हूँ। वो हल्के से थप्पड़ मारता है, “हाँ, मेरी रानी... तू मेरी स्लट है... ले मेरे थप्पड़ और लंड!” मेरी गांड जल रही है, लेकिन उत्तेजना में मज़ा आ रहा है।

मैं दूसरी बार झड़ने के करीब हूँ। “दीपक, मैं फिर झड़ने वाली हूँ... मत रुक!” मैं चीखती हूँ। वो मेरे बाल पकड़ता है, “झड़ जा, कामिनी... तेरी चूत को कसते हुए महसूस करना चाहता हूँ!” और मैं ज़ोर से चीखते हुए दूसरी बार झड़ जाती हूँ, मेरी चूत कसकर उसके लंड को मिल्क करती है। वो पोजिशन चेंज करता है, “अब साइड में, कामिनी... तुझे गले लगाकर चोदूँगा,” वो कहता है। वो मेरे पीछे लेटता है, मेरा एक पैर उठाकर साइड-लाइंग में लंड डालता है। “आह्ह... दीपक, इस तरह तेरा लंड अलग एंगल से हिट कर रहा है... हाँ, ऐसे ही!” मैं कहती हूँ। वो धीरे-धीरे थ्रस्ट करता है, मेरी क्लिट को उंगली से रगड़ता है। “कामिनी, तेरे साथ सुहागरात की सुबह और हॉट हो गई है,” वो कहता है।

अब वो मुझे पूल में उठाता है, स्टैंडिंग पोजिशन में। मैं अपने पैर उसकी कमर पर लपेटती हूँ, वो मुझे दीवार से सटाकर चोदता है। “दीपक, तू कितना स्ट्रॉंग है... मुझे उठाकर चोद... और गहरा!” मैं चीखती हूँ। वो तेज़ थ्रस्ट करता है, पानी हमारे जिस्मों पर स्प्लैश कर रहा है। “कामिनी, मैं झड़ने वाला हूँ... तेरी चूत मुझे पागल कर रही है... कहाँ डालूँ?” वो पूछता है। “अंदर ही डाल, दीपक... मेरी चूत को अपने माल से भर दे!” मैं कहती हूँ। वो कुछ आखिरी तेज़ थ्रस्ट्स मारता है, और ज़ोर से चीखते हुए झड़ जाता है, उसका गर्म माल मेरी चूत में उड़ेल जाता है, और मैं तीसरी बार झड़ जाती हूँ। हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, पानी में तैरते हुए।

“कामिनी, तू मेरी जिंदगी है... ये सुहागरात की सुबह भूलूँगा नहीं,” दीपक कहता है, और मुझे किस करता है।

पाठक प्रतिक्रिया • Reader Confessions

कामिनी के नाम आपकी पाती

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2 प्रतिक्रियाएं (2 Confessions)
H
हर्षवर्धन सत्यापित पाठक
2 दिन पहले
सुबह की धूप, नीला पानी और भीगा हुआ बदन... हर शब्द में ताज़गी और कामुकता भरी है।
R
रितु गर्ग सत्यापित पाठक
4 दिन पहले
सुहागरात की वो सुबह... दीपक की मोहब्बत और कामिनी की तृप्ति साफ़ झलकती है।
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