दिवाली के बाद का समय था, हवा में हल्की ठंड थी। मैं, कामिनी, अपनी सहेली शिमुल के घर पर आमंत्रित थी। मैंने एक शीशे-सी चमकती लाल साड़ी चुनी, जो मेरे 40DD के कर्व्स को पूरी तरह उभार रही थी। मेरा काला लेस वाला ब्लाउज इतना टाइट था कि मेरे बूब्स बाहर निकलने को बेताब थे, और पारदर्शी साड़ी से मेरी गहरी नाभि साफ दिख रही थी। मुझे शिमुल का पति हार्दिक बहुत पहले से क्रश था—उसकी मस्कुलर बॉडी, वो गहरी आंखें, और वो सेक्सी स्माइल, हाय! मैं कार पार्क कर रही थी, मेरी हाई हील्स सैंडल की आवाज़ गली में गूंज रही थी, तभी शिमुल का कॉल आया।
"कामिनी, मैं ऑफिस में फंस गई हूँ। एक जरूरी प्रोजेक्ट है, दो घंटे लगेंगे। हार्दिक और मेरा बेटा अर्जुन घर पर हैं। तुम उनके साथ चाय-वाय पी लेना, मैं जल्दी आऊंगी," उसने हड़बड़ी में कहा।
मैंने मन में सोचा, "अरे वाह, ये तो लॉटरी लग गई!" हार्दिक के साथ अकेले वक्त बिताने का मौका, वो भी शिमुल की गैरहाजिरी में! मेरी चूत में हल्की सी गुदगुदी होने लगी। मैंने अपनी साड़ी ठीक की, लिप्सटिक का एक और कोट लगाया, और दरवाजे की ओर बढ़ी।
हार्दिक ने दरवाजा खोला। नीली ट्रैक पैंट और टाइट टी-शर्ट में वो किसी ग्रीक गॉड सा लग रहा था। उसकी छाती की मसल्स टी-शर्ट से उभर रही थीं। उसका बेटा अर्जुन अपने कमरे में था। "हाय कामिनी, आओ ना, तुम तो गजब की लग रही हो!" उसने मुस्कुराते हुए कहा, उसकी नजर मेरे क्लीवेज पर रुकी।
"तुम भी तो कम नहीं, हार्दिक," मैंने आंख मारते हुए कहा और सोफे पर बैठ गई, जानबूझकर पल्लू को थोड़ा सरकाया ताकि मेरे बूब्स का आधा हिस्सा साफ दिखे। हम बातें करने लगे—मौसम, फिल्में, लेकिन मेरी नजर उसके ट्रैक पर थी। उसका लंड सख्त होकर उभर रहा था, मानो चड्डी न पहनी हो। "हाय दैया, ये तो पहले से तैयार है!" मैंने मन में सोचा।
मैंने हिम्मत जुटाई, उसकी जांघ पर हाथ रखा, और धीरे से बोली, "हार्दिक, तुम जिम में कितना पसीना बहाते हो, मसल्स तो रॉक जैसे हैं!" मेरा हाथ धीरे-धीरे उसके लंड की ओर बढ़ा, हल्का सा टच किया। वो हिचकिचाया नहीं, बल्कि मुस्कुराया, "कामिनी, तुम तो आग लगा रही हो... ये क्या कर रही हो?"
मैंने उसकी आंखों में देखा, होंठ चाटे, और कहा, "बस, तुम्हारी तारीफ कर रही हूँ... और ये देख रही हूँ कि तुम कितने तैयार हो!" मैंने उसे गहरा, गीला किस किया—हमारी जीभें आपस में उलझ गईं, उसका हाथ मेरी कमर पर चला गया। वो बोला, "शिमुल को पता चला तो बवाल हो जाएगा!"
"चुप, आज सिर्फ हमारा राज है," मैंने कहा और उसे बेडरूम की ओर खींच लिया।
बेडरूम में घुसते ही हार्दिक ने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा, पूरी साड़ी फर्श पर गिर गई। मेरा काला लेस वाला ब्लाउज मेरे बूब्स को मुश्किल से संभाल रहा था। उसने ब्लाउज के बटन खोले, ब्रा ऊपर सरकाई, और मेरे निपल्स चूसने लगा। "कामिनी, तेरे बूब्स तो रसीले आम हैं... कितने सॉफ्ट!" वो मेरे बूब्स को मसल रहा था, निपल्स को काट रहा था। मैं सिसकारी, "आह हार्दिक, चूसो और जोर से... मेरे निपल्स को खा जाओ!"
मैंने उसकी टी-शर्ट फाड़ दी, उसकी छाती चाटी, निपल्स काटे। फिर उसका ट्रैक नीचे खींचा—हाय राम! 12 इंच का मोटा, नसों वाला लंड, लाल सुपारा चमक रहा था, चड्डी का नामोनिशान नहीं। "हार्दिक, ये तो राक्षस है... मेरी चूत फट जाएगी!" मैं घुटनों पर बैठी, दोनों हाथों से पकड़ा, सुपारे को चूमा, जीभ से चाटा। फिर मुंह में लिया—पूरा गले तक! वो मेरे बाल पकड़कर धक्के मारने लगा, "चूस रंडी... ले पूरा अंदर... आह, तेरा मुंह तो स्वर्ग है!" मेरी लार टपक रही थी, गले में खराश हो रही थी, लेकिन मैं चूसती रही—सुपारा चाटा, गेंदें सहलाई, पूरा लंड गीला कर दिया। 20 मिनट तक उसने मेरे मुंह को चोदा, मेरी ठुड्डी लार से चिपचिपी थी।
उसने मुझे नंगा किया—ब्रा, पैंटी फाड़ दी। मैं पलंग पर लेटी, टांगें चौड़ी, मेरी गुलाबी चूत गीली चमक रही थी। वो झुका, "वाह, कामिनी, तेरी चूत तो शहद की मक्खी!" उसकी जीभ मेरी क्लिट पर नाचने लगी, होंठों को चूसा, दो उंगलियां अंदर-बाहर। मैं चिल्लाई, "हार्दिक, और चाट... मेरी चूत को खा जा... आह, मैं झड़ने वाली हूँ!" उसने मेरी क्लिट को दांतों से हल्का काटा, जीभ गहराई तक डाली। मेरी चूत से पानी बहने लगा, मैं दो बार झड़ी। 15 मिनट तक चाटा, मेरा पूरा बदन कांप रहा था।
उसने मुझे घोड़ी बनाया। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ा, सुपारा मेरे होंठों को खींच रहा था। फिर एक झटके में पूरा अंदर! "आआआह्ह्ह... हार्दिक, फट गई मैं!" उसका 12 इंच का लंड मेरी चूत की गहराई तक गया, दीवारें खिंच रही थीं। वो कमर पकड़कर ठोकने लगा—धड़-धड़-धड़! उसकी गेंदें मेरी गांड से टकरा रही थीं। "चोद रंडी... ले मेरा पूरा लंड!" वो चिल्लाया। मैं चिल्लाई, "हाँ, फाड़ दो मेरी चूत... और जोर से!" मेरे बूब्स झूल रहे थे, मैं पलंग की चादर नोच रही थी। 10 मिनट तक ठोका, मैं तीसरी बार झड़ी, मेरी चूत से पानी टपक रहा था।
तभी दरवाज़ा खुला।
अर्जुन।
उसका बेटा।
20 साल का जवान लड़का।
वो चुपचाप कमरे में आया… और मेरा नंगा बदन देख उसके चेहरे पर कोई हैरानी नहीं थी, बस भूख थी। उसने अपने कपड़े फेंके — उसका लंड 8 इंच का था, मोटा और सीधा खड़ा।
"तू भी...?" मैंने आँखों से पूछा।
वो हंसा, "पापा, आंटी को मजा दे रहे हो? मेरी बारी!"
उसने बिना कुछ कहे अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया।
"चूसो आंटी... मेरा भी चखो!" मैं चौंकी, लेकिन जोश में थी। अब हार्दिक पीछे से चूत चोद रहा, अर्जुन मेरे मुंह को। मैं बीच में फंसी, दो लंडों की रंडी। हार्दिक के धक्के मेरी चूत को फाड़ रहे, "ले रंडी, दोनों तरफ से चुद!" अर्जुन मेरे बाल पकड़कर मुंह में धक्के मार रहा, "आंटी, तेरा मुंह तो वैक्यूम है!" मेरी सिसकारियां दबीं, लार और प्रीकम मेरे होंठों से टपक रहा। 10 मिनट तक संडविच चुदाई, मेरी गांड लाल, मुंह गीला।
अर्जुन बोला, "पापा, अब असली खेल!" हार्दिक ने लंड चूत से निकाला, मेरी गांड पर थूक लगाया, और धीरे-धीरे 12 इंच अंदर डाला। "आह्ह्ह... हार्दिक, मेरी गांड फट रही है!" दर्द और मजा एकसाथ। अर्जुन नीचे लेटा, मैं उसकी लंड पर चूत में बैठी। अब दोनों छेद भरे—हार्दिक गांड में, अर्जुन चूत में। दोनों एकसाथ ठोकने लगे। "कामिनी, तू तो हमारी रंडी है... ले दोनों लंड!" हार्दिक गरजा। मैं चिल्लाई, "हाय... दोनों रगड़ रहे अंदर... मार डालोगे!" हार्दिक की गेंदें मेरी गांड से टकरा रही, अर्जुन नीचे से चूत ठोक रहा। मेरी चूत और गांड में लंड रगड़ रहे, मैं कांप रही थी। 15 मिनट तक चोदा, मैं चार बार झड़ी—पानी चूत और गांड से बह रहा था।
अर्जुन नीचे लेटा, मैं उसके लंड पर कूदने लगी—चप-चप-चप! मेरी चूत उसका लंड निगल रही थी। हार्दिक ने पीछे से गांड में फिर डाला। "कामिनी, कूद रंडी... हमारी दूध की मक्खी!" मैं चिल्लाई, "हाँ, चोदो... मैं तुम्हारी रंडी हूँ!" अर्जुन का गर्म वीर्य मेरी चूत में छूटा, इतना कि ओवरफ्लो हो गया। फिर हार्दिक ने मुझे मिशनरी में लिटाया, टांगें कंधों पर। 20 मिनट ठोका—धीरे, तेज, गहरा। "तेरी चूत स्वर्ग है, कामिनी!" मैं बोली, "झड़ जाओ अंदर!" लेकिन वो उठा, मेरे मुंह-चेहरे पर पिचकारी मारी—गाढ़ा, गर्म वीर्य, जैसे ज्वालामुखी! मुंह, आंखें, बाल सब भर गए। "हार्दिक, ये तो बाढ़ है!" मैंने चाटा, निगला—नमकीन, गर्म, स्वादिष्ट।
हमने कपड़े पहने, बाहर चाय पीते हुए नॉर्मल बातें। पांच मिनट बाद शिमुल आई। मैंने मन में सोचा, "दो घंटे की चुदाई, लेकिन मजा... उफ्फ, जिंदगी का सबसे गर्म दिन!"
कामिनी के नाम आपकी पाती
बेझिझक अपने दिल की बात लिखें — अपनी सच्ची राय या दास्ताँ यहाँ साझा करें।