मुझे सेहत को लेकर कुछ परेशानी रहती थी।
मेरे सीने में दर्द की शिकायत रहती थी और बालों के झड़ने से भी परेशान रहती थी।
मैं कई जगह इलाज करवा चुकी थी लेकिन आराम नहीं मिल रहा था।
फिर किसी ने मुझे होम्योपैथी का इलाज करवाने की सलाह दी।
मैंने एक प्राइवेट क्लीनिक का पता लिया और वहाँ पहुँच गई।
क्लीनिक में भीड़ कम थी। डॉक्टर हर मरीज को पूरा समय दे रहे थे।
मेरा नम्बर आया। मैं अंदर गई।
डॉक्टर ने अच्छे से मेरी सारी बात सुनी।
मैंने बताया— “मुझे सीने में दर्द रहता है और कभी-कभी पेट के नीचे भी दर्द होता है।”
डॉक्टर ने मुझे टेबल पर लेटने को कहा।
मैं लेट गई।
उन्होंने पूछा कि कहाँ-कहाँ दर्द महसूस करती हो?
मैंने बताया सीने के बीच में अचानक दर्द होने लगता है।
डॉक्टर ने ब्लाउज के बटन खोलने को कहा।
बटन खोलने के बाद ब्रा को भी हटाने को कहा तो मैंने ब्रा भी ऊपर खिसका दी।
अब मेरे दोनों बूब्स डॉक्टर के सामने थे— मुलायम, भारी और थोड़े से लटकते हुए।
मैं दूसरी तरफ नज़र करके लेटी रही, लेकिन मेरी साँसें पहले से तेज़ हो चुकी थीं।
डॉक्टर ने बूब्स को छुआ और कहा— “कसाव कम होने के कारण ये नीचे की तरफ आ गए हैं जिससे सीने में दर्द महसूस होता है। एक्सरसाइज से ये दर्द सही हो जायेगा, डरने की कोई बात नहीं है।”
फिर डॉक्टर ने मेरे एक चूचे को हाथ में भरा और मसलने लगे।
उसके मोटे हाथों की गर्मी मेरे निप्पल पर लगते ही मेरी कमर हिल गई।
मैंने पूछा— “ये… ये क्या कर रहे हो आप?” आवाज़ मेरी थोड़ी काँप गई थी।
वे बोले— “मसाज कर रहा हूँ। यही एकमात्र इलाज है दर्द से छुटकारा पाने का।”
मैं चुपचाप लेटी रही, लेकिन जब उसने दोनों बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाना और गोल-गोल मसलना शुरू किया तो मेरे मुँह से हल्की सी कराह निकल गई— “आह्ह…”
बीस मिनट तक वो मेरे बूब्स को मसलता रहा। निप्पल सख्त हो गए थे। मेरे शरीर में गर्मी फैलने लगी थी।
फिर उन्होंने पूछा— “कभी पेट के नीचे भी दर्द होता होगा?”
मैंने कहा— “हाँ… कभी-कभी होता है।” आवाज़ में हल्की सी बेचैनी थी।
डॉक्टर ने कहा— “उसके लिए एक तरीका एक्सरसाइज का है।”
मैंने सिर्फ सिर हिलाया।
भीतर ही भीतर मेरी चूत पहले से गीली होने लगी थी।
डॉक्टर मेरे पेट को सहलाने लगा। उसके हाथ धीरे-धीरे नीचे सरक रहे थे।
जब उसने पेटीकोट का नाड़ा ढीला करने को कहा तो मैंने बिना किसी विरोध के हाँ कर दी।
पेटीकोट ढीला होते ही उसका हाथ सीधे मेरी नंगी चूत पर आ गया।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।
जैसे ही उसकी उंगलियाँ मेरी गीली फाँकों पर पड़ीं, मेरे मुँह से एक लंबी कराह निकल गई— “आह्ह्ह… डॉक्टर…”
वो मेरी चूत को सहलाने लगा।
पहले सिर्फ बाहर से… फाँकों को खोलता, क्लिट को गोलाकार में रगड़ता।
मेरी चूत से पानी रिसने लगा था।
मैं टाँगें थोड़ी फैलाते हुए कराह रही थी— “आह्ह… उम्मम्म… अच्छा लग रहा है…”
फिर उसने एक उंगली अंदर घुसा दी।
गीली चूत ने आसानी से निगल लिया।
“आह्ह्ह… धीरे…” मैंने कराहते हुए कहा, लेकिन मेरी कमर खुद उसकी उंगली के पीछे उठ रही थी।
वो उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
चप-चप की गीली आवाज़ आने लगी।
मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि हर बार उंगली निकलते समय पानी की लाइनें चमकती थीं।
मैं जोर-जोर से साँस ले रही थी और कराह रही थी— “आह्ह… आह्ह… और अंदर… उंगली और डालो…”
डॉक्टर ने दूसरी उंगली भी डाल दी।
अब दो उंगलियाँ मेरी चूत को फैला-फैला कर चोद रही थीं।
मेरी आँखें बंद थीं, होंठ खुले हुए, और मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं— “उम्मम्म… आह्ह्ह… डॉक्टर
साहब… बहुत अच्छा लग रहा है…”
वो उंगलियों को घुमा-घुमा कर मेरी चूत की दीवारों को सहला रहा था।
क्लिट को अंगूठे से रगड़ रहा था।
मेरा बदन काँप रहा था। चूत से पानी बह रहा था।
मैं टाँगें और चौड़ी करके उसकी उंगलियों को गहराई तक लेने लगी थी।
जब वो तीन उंगलियाँ डालने लगा तो मैं जोर से चीख पड़ी— “आह्ह्ह्ह… बहुत… बहुत मोटा… लेकिन मत निकालना…”
मेरी चूत उसके हाथों में पूरी तरह से पिघल चुकी थी।
डॉक्टर ने देखा कि मैं पूरी तरह से तैयार हूँ।
उसने जैल लगाया और कहा— “अब और अच्छी मसाज करनी होगी।”
उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा पूरी तरह हटा दिए।
साड़ी भी निकाल दी।
अब मैं पूरी नंगी लेटी थी— बूब्स फैले हुए, निप्पल तने हुए, और चूत खुली, चमकदार गीली।
डॉक्टर ने अपना लंड बाहर निकाला।
मोटा, लंबा, नसों से भरा, और सिर पर पहले से चमकता हुआ।
मैं उसको देखते ही और गीली हो गई।
बिना कुछ कहे मैं उठकर बैठ गई और उसके लंड को हाथ में ले लिया।
गर्म… सख्त… धड़कता हुआ।
मैंने पहले जीभ से उसके टिप को चाटा, फिर पूरा मुँह खोलकर अंदर ले लिया।
“उम्मम्म…” मैंने गहरी आवाज़ निकाली जैसे लंड का स्वाद ले रही हूँ।
गले तक खींच लिया। लार बहने लगी।
डॉक्टर ने मेरे बाल पकड़ लिए और धीरे-धीरे धक्के देने लगा।
मैं चूस रही थी— जोर से, गहरी, कभी सिर को चूसती, कभी पूरा निगल जाती।
मेरी आँखों में पानी आ गया था लेकिन मैं रुक नहीं रही थी।
“आह्ह… कामिनी… क्या मुँह है तेरा…” वो कराह रहा था।
पाँच-सात मिनट तक मैंने उसके लंड को अच्छी तरह से चाटा और चूसा।
मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि शीट गीली पड़ने लगी थी।
फिर उसने मुझे शीट पर लिटा दिया।
मेरे होंठ चूमे, बूब्स मसले, और अपना चिकना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा।
एक ज़ोर का झटका… और पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।
“आह्ह्ह्ह्ह… धीरे… बहुत बड़ा है…” मैं चीख उठी, लेकिन मेरी टाँगें खुद उसकी कमर के चारों ओर लिपट गईं।
वो रुक गया, फिर धीरे-धीरे धक्के देने लगा।
हर धक्के के साथ मेरी चूत खुलती जा रही थी।
चप-चप… चप-चप… की गीली आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
मैं जोर-जोर से कराह रही थी— “आह्ह… आह्ह… और अंदर… जोर से चोदो डॉक्टर… मेरी चूत फाड़ दो…”
वो तेज़ होने लगा।
लंड पूरा निकाल कर फिर ज़ोर से घुसा देता।
मेरी चूचियाँ हिल रही थीं। वो उनको मुँह में भर-भर कर चूस रहा था।
मैं उसके बाल खींच रही थी, पीठ पर नाखून गड़ा रही थी।
कुछ देर मिशनरी में चोदने के बाद उसने मुझे उठाया और एक कुर्सी की तरफ ले गया।
वो खुद कुर्सी पर बैठ गया। उसका लंड सीधा ऊपर की तरफ तना हुआ था— चमकदार, गीला और फड़कता हुआ।
उसने मुझे अपनी गोद में खींच लिया।
मैंने उसके कंधों को पकड़ा और धीरे-धीरे अपनी गीली चूत को उसके लंड के सिर पर टिकाया।
जैसे ही टिप अंदर घुसा, मेरे मुँह से लंबी कराह निकल गई— “आह्ह्ह्ह… कितना गरम है…”
फिर मैंने कमर झुकाई और धीरे-धीरे पूरा लंड अपनी चूत में उतार लिया।
एक-एक इंच… जब तक वो मेरी चूत की तलहटी तक नहीं पहुँच गया।
“उम्मम्म… पूरा अंदर है… आह्ह…” मैं काँपते हुए बोली।
अब मैं उसके लंड पर बैठकर उछलने-कूदने लगी।
पहले धीरे-धीरे… ऊपर उठती और फिर ज़ोर से बैठ जाती।
हर बार जब मैं नीचे बैठती तो उसका लंड मेरी चूत को पूरी तरह चीरता हुआ अंदर तक चला जाता।
चप-चप… धप्प… धप्प… की जोरदार आवाज़ें आने लगीं।
मेरे भारी बूब्स उसके चेहरे के सामने हिल रहे थे।
उसने दोनों चूचियों को मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।
मैं और तेज़ कूदने लगी।
कमर मटकाती हुई, चूत को उसके लंड पर पेलती हुई।
“आह्ह… आह्ह… डॉक्टर… मेरी चूत चोद रही हूँ आपके लंड से… कितना मज़ा आ रहा है…” मैं जोर-जोर से कराह रही थी।
वो मेरी कमर पकड़ कर नीचे से भी धक्के दे रहा था।
जब मैं ऊपर उठती तो वो मुझे ज़ोर से खींच कर अपने लंड पर बैठा देता।
मेरी चूत इतनी गीली थी कि हर उछाल के साथ पानी की बौछारें उसके जाँघों पर गिर रही थीं।
मैं पागलों की तरह कूद रही थी— तेज़… और तेज़…
मेरी गाँड उसके जाँघों पर थपथपा रही थी।
बूब्स उसके चेहरे पर बार-बार लग रहे थे।
“आह्ह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… और जोर से…” मैं चीख उठी।
वो भी कराह रहा था— “हाँ रांड… कूद… मेरे लंड को अपनी चूत से चोद…”
मैंने दोनों हाथ उसके कंधों पर रखे और पूरे जोर से उछलने लगी।
लंड हर बार मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था।
मेरी आँखें पलटने लगीं। बदन काँपने लगा।
एक तेज़ झटके के साथ मैं जोर से झड़ गई— “आह्ह्ह्ह्ह… आ गया… आ गया…”
मेरी चूत उसके लंड को जकड़कर मरोड़ रही थी। पानी की तेज़ धार निकल पड़ी।
लेकिन वो अभी नहीं रुका।
उसने मुझे पकड़ कर कुर्सी से उठाया और फिर से घोड़ी की पोज़ीशन में बिठा दिया।
मैं गाँड उठाकर झुक गई। मेरी खुली, लाल, पानी टपकाती चूत उसके सामने थी।
उसने पीछे से एक झटके में पूरा लंड घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… माँ… कितना गहरा…” मैं चिल्लाने लगी।
अब वो कमर पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से पेलने लगा।
धक्के इतने तेज़ थे कि मेरी गाँड थपथपा रही थी।
हर धक्के के साथ मेरी चूत से पानी की बौछारें निकल रही थीं।
मैं लगातार कराह रही थी— “आह्ह… आह्ह… चोदो… और जोर से… मेरी चूत चोद डालो…”
दस मिनट तक उसने मुझे इस पोज़ीशन में बुरी तरह चोदा।
मेरा बदन काँप रहा था। मैं फिर से झड़ने वाली थी।
अचानक वो बोला— “माल निकलने वाला है…”
मैंने कहा— “चूत में मत निकालना…”
उसने लंड निकाला, मुझे पलट दिया और ज़ोर-ज़ोर से हिलाते हुए मेरी चूचियों पर गाढ़ा, गर्म वीर्य छोड़ दिया।
पिचकारियाँ मेरी छातियों पर फैल गईं। कुछ बूँदें मेरे मुँह पर गिरीं— मैंने जीभ निकालकर चाट लिया।
वो शांत होकर पैंट पहनने लगा।
मैं अभी भी काँप रही थी, चूत धड़क रही थी, और पूरे शरीर पर उसकी गर्मी और गंध फैली हुई थी।
मैंने खुद को साफ किया और साड़ी पहन ली… लेकिन उस दिन की चुदाई की याद अभी भी मेरी चूत को गीला कर देती है।